Water Metro India: वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज समेत देश के 18 शहरों में वाटर मेट्रो सर्विस की तैयारी, जानिए क्या है पूरा प्लान
Water Metro India: कोच्चि वाटर मेट्रो की सफल शुरुआत के तीन साल बाद अब केंद्र सरकार देश के 18 और शहरों में वॉटर मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस योजना को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज समेत देश के 18 शहरों में वाटर मेट्रो सर्विस की तैयारी, जानिए क्या है पूरा प्लान
Water Metro India: कोच्चि वाटर मेट्रो की सफल शुरुआत के तीन साल बाद अब केंद्र सरकार देश के 18 और शहरों में वॉटर मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस योजना को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि सरकार चरणबद्ध तरीके से कई शहरों में वॉटर मेट्रो सिस्टम शुरू करने की तैयारी को तेजी से आगे बढ़ा रही है।
पहले चरण के अंतर्गत गुवाहाटी, श्रीनगर, पटना, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज सहित कई शहरों में वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना बनाई गई है। वहीं असम के तेजपुर और डिब्रूगढ़ को दूसरे चरण में शामिल करने का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार ड्राफ्ट नेशनल वॉटर मेट्रो पॉलिसी 2026 पर भी तेजी से काम कर रही है। इस मसौदे को अलग-अलग मंत्रालयों से चर्चा और सुझाव के लिए भेजा गया है। इसका उद्देश्य देश में शहरी जल परिवहन व्यवस्था के लिए एक मजबूत और स्पष्ट राष्ट्रीय ढांचा तैयार करना है।
Union Minister of Ports, Shipping and Waterways @sarbanandsonwal chaired a review meeting in New Delhi on the rollout of Water Metro services nationwide.
The Centre plans to launch Water Metro services in 18 cities, with Guwahati among the Phase I cities alongside Srinagar,… pic.twitter.com/tRnBRSXcTA — All India Radio News (@airnewsalerts) May 19, 2026
पारंपरिक मेट्रो से सस्ती और आसान होगी वॉटर मेट्रो
इस पहल के पीछे की सोच को समझाते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि वॉटर मेट्रो सिस्टम पारंपरिक मेट्रो परियोजनाओं की तुलना में काफी कम खर्चीले होते हैं। इसकी वजह यह है कि इसमें पहले से मौजूद जलमार्गों का इस्तेमाल किया जाता है और बहुत कम निर्माण कार्य की जरूरत पड़ती है।
उन्होंने कहा, “वॉटर मेट्रो प्रोजेक्ट को कम समय में तैयार किया जा सकता है। इसमें जमीन की जरूरत भी कम पड़ती है और इलेक्ट्रिक व हाइब्रिड फेरी के इस्तेमाल से संचालन लागत भी घटती है। यही वजह है कि यह पारंपरिक शहरी परिवहन के मुकाबले एक बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बनकर उभर रहा है।”
सोनोवाल ने कहा कि इससे शहरों में ट्रैफिक जाम कम होगा और लोगों को आरामदायक, खूबसूरत और आसान यात्रा का अनुभव मिलेगा।
कोच्ची मॉडल पर देशभर में शुरू होगी वॉटर मेट्रो सेवा
यह योजना कोच्ची वाटर मेट्रो के सफल संचालन के अनुभव पर आधारित है। इसका उद्देश्य देश के अंदरूनी जलमार्गों को टिकाऊ पब्लिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर में बदलना है। यह पहल सिर्फ रोजाना सफर करने वाले लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि जलमार्ग वाले शहरों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी तैयार की जा रही है।
मंत्रालय के अनुसार, वॉटर मेट्रो परियोजनाओं को उन शहरों में प्राथमिकता दी जाएगी जहां लगातार या आंशिक रूप से जुड़े जलमार्ग मौजूद हैं, आबादी 10 लाख से ज्यादा है और परिवहन की मांग अधिक है, खासकर पर्यटन वाले क्षेत्रों में। हालांकि, उन परियोजनाओं के लिए नियमों में कुछ छूट दी जा सकती है जो ट्रैफिक जाम कम करने, दूरदराज या जलमार्ग से घिरे इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर बनाने या बाढ़ जैसी स्थितियों से निपटने में मदद करें।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया वॉटर मेट्रो सिस्टम
प्रस्तावित वॉटर मेट्रो सिस्टम को एक पूरी व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें एक जैसे डिजाइन वाली फेरी, टर्मिनल, पोंटून, चार्जिंग और ईंधन सुविधाएं, यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं और नेविगेशन सिस्टम शामिल होंगे। सरकार जहाज निर्माण में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने और वॉटर मेट्रो को मौजूदा पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोड़ने पर भी जोर दे रही है।
इसके अलावा, सरकार वॉटर मेट्रो परियोजनाओं के लिए कई तरह के फंडिंग मॉडल पर काम कर रही है। इनमें केंद्र और राज्य सरकार की साझा फंडिंग, पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा फंडिंग, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) और पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा फंडिंग जैसे विकल्प शामिल हैं। मंत्रालय का कहना है कि लंबे समय तक परियोजना को सफल बनाए रखने के लिए लागत कम रखना और संचालन को ज्यादा प्रभावी बनाना सबसे अहम रहेगा।
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने फरवरी 2025 में कोच्ची मेट्रो रेल लिमिटेड (KMRL) को 18 शहरों में वाटर मेट्रो की व्यवहार्यता जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इन स्टडी में मौजूदा परिवहन व्यवस्था, यात्रियों की जरूरत, आर्थिक व्यवहार्यता और दूसरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जुड़ाव जैसे पहलुओं का आकलन किया जा रहा है।
17 शहरों की ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार, कई को मिली मंजूरी
सभी 18 प्रस्तावित शहरों का दौरा पूरा हो चुका है, जबकि 17 शहरों की ड्राफ्ट व्यवहार्यता रिपोर्ट भी जमा कर दी गई है। श्रीनगर, पटना, गुवाहाटी, वाराणसी और अयोध्या के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट को मंजूरी भी मिल चुकी है।
सोनोवाल ने कहा कि परियोजना का बड़ा उद्देश्य विश्व स्तरीय, टिकाऊ परिवहन प्रणालियां बनाना है जो शहरी परिवहन और शहरों की पहचान दोनों को बढ़ाएं। उन्होंने कहा, "वाटर मेट्रो परियोजनाएं शहरों की सुंदरता, प्रतिष्ठा और विरासत को बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को विश्वस्तरीय यात्रा सुविधा भी देंगी।"