पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनाव की मतगणना के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पुणे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) 47 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि अजित पवार की NCP केवल 12 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। वहीं, पिंपरी-चिंचवड में भी बीजेपी ने बड़ी बढ़त बनाते हुए 38 सीटों पर अपना दबदबा कायम किया है।
चुनाव प्रचार के दौरान अजित पवार ने पुणे की बढ़ती ट्रैफिक समस्या को मुख्य मुद्दा बनाया था। उन्होंने दावा किया था कि पुणे ट्रैफिक के मामले में दुनिया में चौथे नंबर पर है, जिससे हर महीने ₹7.5 करोड़ का ईंधन बर्बाद होता है और सालाना ₹10,800 करोड़ का आर्थिक नुकसान होता है।
इस समस्या के समाधान के रूप में अजित पवार ने वादा किया था कि वे नागरिकों के लिए PMPML बस सेवा और मेट्रो को मुफ्त कर देंगे। उनका मानना था कि इससे सड़कों पर गाड़ियां कम होंगी और प्रदूषण भी घटेगा। हालांकि, चुनावी नतीजों से साफ है कि जनता ने उनके इस मुफ्त सेवा वाले वादे पर भरोसा नहीं जताया।
पिंपरी-चिंचवड नगर निगम की स्थिति (कुल 128 सीटें):
कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट), NCP (शरद पवार गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माल सेना जैसी पार्टियों को इन चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
ये नतीजे दिखाते हैं कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड के इलाके में बीजेपी का दबदबा बढ़ता जा रहा है, जिससे अजित पवार के नेतृत्व पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के बाद सबसे धनी नगर निगमों में से एक माने जाने वाले पिंपरी-चिंचवड नगर निगम पर 2017 से शरद पवार की अविभाजित NCP का कब्जा था। हालांकि, आक्रामक चुनाव प्रचार के बावजूद पवार परिवार इस गढ़ को भी खो रहा है।
चाचा और भतीजा, जिन्होंने पहले NCP में एक साथ काम किया था, 2023 में तब अलग हो गए, जब अजीत पवार ने महाराष्ट्र में भाजपा के साथ गठबंधन किया। शरद पवार का NCP गुट राज्य और केंद्र दोनों में विपक्षी गठबंधन का हिस्सा रहा है।
पिछले साल महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन की शानदार जीत के बाद उनके बीच सुलह की अपीलें उठने लगीं।