Raghav Chadha Blinkit Agent: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकइट जैसी ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी एजेंट्स की समस्याओं को उठाने के लिए सुर्खियों में हैं। इस बीच, उन्होंने कुछ ऐसा किया है जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। राघव चड्ढा ने सोमवार (12 जनवरी) को क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'ब्लिंकिट' के साथ डिलीवरी एजेंट के तौर पर एक दिन बिताने का वीडियो शेयर किया है।
उन्होंने भारत के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की गिग इकॉनमी में सुधार और डिलीवरी वर्कर्स के लिए बेहतर काम करने की स्थितियों पर जोर दिया। लोग उनकी जमकर तारीख कर रहे हैं। राज्यसभा सदस्य का यह कदम डिलीवरी पार्टनर्स को रोजोना होने वाली मुश्किलों को समझने के लिए था। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे उन्होंने संसद और पब्लिक प्लेटफॉर्म पर भी उठाया है।
राघव चड्ढा ने एक दिन के लिए ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय की भूमिका निभाई। वह खुद डिलीवरी एजेंट बनकर सड़कों पर निकल पड़े। चड्ढा का यह कदम गिग वर्कर्स की ओर से पॉलिसी में बदलाव की बढ़ती मांगों के बीच आया है। इसमें 10-मिनट मॉडल जैसी अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी टाइमलाइन को खत्म करने की मांग भी शामिल है। इसके बारे में वर्कर्स का कहना है कि इससे दबाव और सुरक्षा जोखिम बढ़ते हैं।
राघव चड्ढा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सोमवार को एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने X पर लिखा, "बोर्डरूम से दूर, जमीनी हकीकत में...। मैंने उनका एक दिन जिया...।" इसके साथ ही उन्होंने "स्टे ट्यून्ड!" लिखकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी। पोस्ट किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि चड्ढा ब्लिंकिट की पीली यूनिफॉर्म पहनते हैं। फिर पीठ पर डिलीवरी बैग टांगते हैं और एक दूसरे ब्लिंकिट राइडर के साथ स्कूटर पर निकल पड़ते हैं।
वीडियो में दोनों डिलीवरी करते नजर आते हैं। कभी लिफ्ट से उतरते हुए तो कभी किसी ग्राहक के दरवाजे तक पहुंचते हुए। वीडियो के आखिरी में वह एक डिलीवरी पूरी करने के लिए आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। दरअसल, करीब एक महीने पहले राघव चड्ढा ने गिग इकॉनमी की कड़वी सच्चाई को उजागर करते हुए एक पोस्ट किया था। उन्होंने ब्लिंकिट के एक डिलीवरी एजेंट की कमाई का स्क्रीनशॉट शेयर किया था।
इसमें दिखाया गया था कि 28 डिलीवरी करने के बाद उस राइडर को सिर्फ 762.57 रुपए मिले। उस स्क्रीनशॉट के मुताबिक, करीब 15 घंटे काम करने के बाद डिलीवरी एजेंट की प्रति घंटे की कमाई सिर्फ 52 रुपए थी। इसमें 690.57 रुपए ऑर्डर पेमेंट से 72 रुपए इंसेंटिव से और बाकी कुछ भी नहीं।
इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी थी। राघव चड्ढा ने तब लिखा था कि कम मजदूरी, भारी टारगेट, नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं और सम्मान की कमी, यही आज के गिग वर्कर्स की हकीकत है। उन्होंने कहा था कि भारत डिजिटल इकॉनमी का निर्माण कम वेतन पाने वाले और ज्यादा काम करने वाले लोगों की पीठ पर नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, गिग वर्कर्स के लिए उचित सैलरी, इंसानी काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा बेहद जरूरी हैं।
इसके कुछ ही दिनों बाद चड्ढा ने उसी डिलीवरी बॉय हिमांशु के साथ एक और वीडियो शेयर किया, जिसमें दोनों साथ लंच करते नजर आए। करीब 17 मिनट के इस वीडियो में उन्होंने गिग वर्कर्स की परेशानियों, जोखिम, लंबे काम के घंटे और सुरक्षा के अभाव पर खुलकर बातचीत की। वहीं, राघव चड्ढा ने सदन में भी जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकइट के राइडर्स और डिलीवरी बॉय को हो रही समस्याओं को रखा था।