अमेरिका-ईरान जंग के कारण मिडिल ईस्ट में बिगड़े हालात और उसके भारत पर पड़ने वाले संभावित असर के मद्देनजर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को मंत्रियों के अनौपचारिक समूह की बैठक की। इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, भारत के परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह मौजूद रहे। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि मध्यम और लंबी अवधि की तैयारी के साथ-साथ तेजी से फैसले लेने की प्रक्रिया भी मजबूत होनी चाहिए।
बता दें कि, राजनाथ सिंह ने शनिवार को पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर नजर रखने और वहां के हालात के अनुसार जरूरी कदम सुझाने के लिए बनाए गए मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (आईजीओएम) की पहली बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि मध्यम और लंबी अवधि की तैयारी के साथ-साथ तेजी से फैसले लेने की प्रक्रिया भी मजबूत होनी चाहिए।
अफवाहों पर रोक लगाने पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार देश के लोगों को किसी भी तरह के खतरे या असर से सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बैठक में यह भी कहा गया कि राज्यों और जिला प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखना बहुत जरूरी है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सभी मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे आपस में जानकारी साझा करें, ताकि अफवाहों, गलत जानकारी और फेक न्यूज का समय पर मुकाबला किया जा सके।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से शुक्रवार को बात की थी। पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन सभी मुख्यमंत्रियों के साथ करीब दो घंटे तक बातचीत की। हालांकि, जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, उन्हें इस बैठक में शामिल नहीं किया गया है। इस बैठक का मकसद साफ था कि दुनिया में चाहे कितनी भी उथल-पुथल मचे, भारत में तेल, गैस और जरूरी सामानों की सप्लाई रुकनी नहीं चाहिए।