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Red Fort Blast Case: लाल किला ब्लास्ट मामले में सनसनीखेज खुलासा, 'घोस्ट सिम' और 'दो फोन' का प्रोटोकॉल फॉलो करते थे आतंकी

Delhi Red Fort Blast Case: लाल किले के पास विस्फोटकों से लदी कार चला रहा डॉ. उमर-उन-नबी धमाके में मारा गया था। इस हमले में कुल 15 लोगों की मौत हुई थी। पाकिस्तानी हैंडलर्स ने इन डॉक्टरों को यूट्यूब के जरिए IED असेंबली सिखाई थी

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jan 04, 2026 पर 4:01 PM
Red Fort Blast Case: लाल किला ब्लास्ट मामले में सनसनीखेज खुलासा, 'घोस्ट सिम' और 'दो फोन' का प्रोटोकॉल फॉलो करते थे आतंकी
टेरर मॉड्यूल में शामिल डॉक्टरों ने सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए 'घोस्ट' सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का एक जटिल जाल बुना था

Red Fort Blast Case: पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार धमाके की जांच में एक बेहद हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है। इस खुलासे से ब्लास्ट में हाई-टेक 'व्हाइट-कॉलर' टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस मॉड्यूल में शामिल उच्च शिक्षित डॉक्टरों ने सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए 'घोस्ट' सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का एक जटिल जाल बुना था। इसी मामले के सामने आने के बाद भारत सरकार ने संचार नियमों में बड़े बदलाव किए है।

टेरर मॉड्यूल का 'डबल फोन' प्रोटोकॉल

जांच अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए डॉक्टर मुजम्मिल गनई, अदील राथर और अन्य सहयोगी एक विशेष 'टैक्टिकल प्रोटोकॉल' का पालन कर रहे थे। हर आरोपी के पास एक अपना निजी फोन था, जो उनके असली नाम पर रजिस्टर्ड था। इसका इस्तेमाल वे अपनी डॉक्टरी और निजी काम के लिए करते थे ताकि किसी को शक न हो। इसके साथ ही उनके पास एक दूसरा फोन होता था जिसे वे केवल पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर से वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर बात करने के लिए इस्तेमाल करते थे।इन फोन में लगे सिम कार्ड उन आम नागरिकों के नाम पर थे, जिनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल किया गया था।

डॉ. उमर ने रची थी लाल किले ब्लास्ट की साजिश

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