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Sabarimala Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हम तय कर सकते हैं कि अंधविश्वास क्या है', केंद्र ने दिया जवाब- 'लॉर्डशिप आप कानून के विद्वान हैं, धर्म के नहीं'

आखिर में कोर्ट ने सुनवाई जारी रखने का फैसला किया। चीफ जस्टिस ने कहा, “आज हम उस पुल को पार कर चुके हैं। जो सवाल तैयार किए गए थे और जिनमें से 5-6 सवालों पर आंशिक बहस हो चुकी है… इन सवालों का रिव्यू पर सीधा असर पड़ेगा। इसलिए यह उचित है कि हम सभी को सुनें

Curated By: Shubham Sharmaअपडेटेड Apr 09, 2026 पर 3:00 PM
Sabarimala Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हम तय कर सकते हैं कि अंधविश्वास क्या है', केंद्र ने दिया जवाब- 'लॉर्डशिप आप कानून के विद्वान हैं, धर्म के नहीं'
Sabarimala Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हम तय कर सकते हैं कि क्या अंधविश्वास है या क्या नहीं', केंद्र ने दिया जवाब- 'लॉर्डशिप आप कानून के विद्वान हैं, धर्म के नहीं'

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह तय कर सकता है कि कोई धार्मिक रिवाज अंधविश्वास है या नहीं। लेकिन केंद्र सरकार ने कोर्ट को जवाब दिया कि संविधान के अनुसार चलने वाले सेकुलर कोर्ट के पास इसकी “विद्वतापूर्ण योग्यता” नहीं है। ऐसे मामले में फैसला कोर्ट को नहीं, बल्कि विधायिका (संसद या विधानसभा) को करना चाहिए।

जस्टिस जोयमल्या बागची, जो 9 जजों की बेंच का हिस्सा हैं, उन्होंने कहा, “हम समझते हैं कि अनुच्छेद 25(2)(b) के तहत विधायिका को धार्मिक मामलों से जुड़ी सेकुलर गतिविधियों को नियंत्रित करने का अधिकार है, लेकिन इससे कोर्ट का बचा हुआ अधिकार पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।”

सबरीमाला मंदिर मामले पर सुनवाई कर रही 9 जजों की बेंच

यह 9 जजों की बेंच सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी उम्र की पाबंदी हटाने वाले 28 सितंबर 2018 के फैसले की समीक्षा से जुड़े संवैधानिक सवालों की सुनवाई कर रही है। बेंच की अध्यक्षता चीफ जस्टिस सूर्या कांत कर रहे हैं। बेंच में जस्टिस बीवी नागरत्ना, एमएम सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी वराले और आर महादेवन भी शामिल हैं।

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