सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह तय कर सकता है कि कोई धार्मिक रिवाज अंधविश्वास है या नहीं। लेकिन केंद्र सरकार ने कोर्ट को जवाब दिया कि संविधान के अनुसार चलने वाले सेकुलर कोर्ट के पास इसकी “विद्वतापूर्ण योग्यता” नहीं है। ऐसे मामले में फैसला कोर्ट को नहीं, बल्कि विधायिका (संसद या विधानसभा) को करना चाहिए।
