सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री बनेंगे, इनकी एजुकेशन और प्रॉपर्टी सबकुछ जानिए

Bihar New CM: सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव, पार्टी बदलने और कई विवादों से भरा रहा है। हालांकि, आज वह लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) गठजोड़ को मजबूत करने वाले प्रमुख OBC चेहरे के रूप में स्थापित हो चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने अपने ऊपर 2 आपराधिक मामले लंबित होने की जानकारी दी है, लेकिन इनमें से कोई भी गंभीर मामला नहीं है

अपडेटेड Apr 14, 2026 पर 4:18 PM
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Bihar New CM: सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री बनेंगे, इनकी एजुकेशन और प्रॉपर्टी सबकुछ जानिए

नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही बिहार को नया मुख्यमंत्री भी मिल गया है। सम्राट चौधरी अब नीतीश कुमार की जगह लेंगे। BJP विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगा दी गई है और कुछ ही देर में आधिकारिक ऐलान भी हो जाएगा। जनवरी 2024 और फिर 2025 में बीजेपी ने उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया। उन्होंने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में मुंगेर जिले की तारापुर विधानसभा सीट से 45,883 वोटों के साथ  जीत हासिल की। उन्होंने बिहार सरकार में वित्त, स्वास्थ्य, और शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले। अब वह सीधे मुख्यमंत्री की नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव, पार्टी बदलने और कई विवादों से भरा रहा है। हालांकि, आज वह लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) गठजोड़ को मजबूत करने वाले प्रमुख OBC चेहरे के रूप में स्थापित हो चुके हैं।

उतार-चढ़ाव भरा रहा राजनीतिक जीवन


चौधरी ने 1990 में राजनीति में कदम रखा और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से शुरुआत की। 1999 में वह राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने, लेकिन उम्र विवाद (25 वर्ष से कम होने) के कारण उन्हें जल्द ही पद से हटना पड़ा और वेतन वापस करने का आदेश दिया गया। 2014 में वह जनता दल यूनाइटेड (JDU) में शामिल हुए और जीतन राम मांझी सरकार में शहरी विकास एवं आवास मंत्री बने।

2017-2018 में BJP का दामन थामने के बाद उनका राजनीतिक ग्राफ तेजी से ऊपर गया। मार्च 2023 से जुलाई 2024 तक उन्होंने बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी का नेतृत्व किया। इसी दौरान उन्होंने यह पगड़ी पहनने की कसम खाई थी कि जब तक भाजपा सत्ता में नहीं लौटेगी, तब तक वह इसे नहीं उतारेंगे।

सम्राट के पास कितनी है संपत्ति?

सम्राट चौधरी की कुल संपत्ति की बात करें, तो चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनके पास कुल संपत्ति करीब ₹11.3 करोड़ है। उन पर कोई कर्ज नहीं है। उनकी सालाना आमदनी लगभग ₹34 लाख बताई गई है

वहीं उनके पास डॉक्टरेट (PhD) की डिग्री है। उन्होंने अपने पेशे के रूप में सामाजिक सेवा को बताया है। इसके अलावा, उन्होंने अपने ऊपर 2 आपराधिक मामले लंबित होने की जानकारी दी है, लेकिन इनमें से कोई भी गंभीर मामला नहीं है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और विवाद

सम्राट चौधरी मुंगेर जिले के लखनपुर गांव से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहे, सात बार विधायक और सांसद बने, जबकि उनकी मां भी विधायक थीं।

चौधरी की शिक्षा हमेशा विवादों में रही है। उन्होंने डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी.लिट.) की डिग्री का जिक्र किया है, वहीं 2010 के हलफनामे में खुद को 7वीं कक्षा तक पढ़ा बताने और 2025 में प्रशांत किशोर की ओर से डिग्री की प्रामाणिकता पर सवाल उठाने के कारण यह मुद्दा सुर्खियों में रहा।

इसके साथ ही साल 2023 में उनका यह बयान भी विवादों में रहा था कि भारत 1947 में नहीं, बल्कि 1977 में जेपी की संपूर्ण क्रांति से आजाद हुआ था।

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