Get App

32 वर्षीय युवक की इच्छामृत्यु याचिका पर SC का फैसला सुरक्षित, कहा- ‘कौन जिएगा, कौन मरेगा यह हम तय नहीं कर सकते’

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 13 वर्षों से कोमा में पड़े 32 वर्षीय हरीश राणा के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति मांगने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने "निष्क्रिय इच्छामृत्यु" शब्द का प्रयोग करने से परहेज किया है।

Translated By: Ashwani Kumar Srivastavaअपडेटेड Jan 15, 2026 पर 2:28 PM
32 वर्षीय युवक की इच्छामृत्यु याचिका पर SC का फैसला सुरक्षित, कहा- ‘कौन जिएगा, कौन मरेगा यह हम तय नहीं कर सकते’
32 वर्षीय युवक की इच्छामृत्यु याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

Supreme Court: इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 13 वर्षों से कोमा में पड़े 32 वर्षीय हरीश राणा के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति मांगने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने "निष्क्रिय इच्छामृत्यु" शब्द का प्रयोग करने से परहेज किया है।

अदालत ने टिप्पणी की, "हम हर दिन मामलों पर फैसला करते हैं, लेकिन ये मुद्दे संवेदनशील हैं। हम भी इंसान हैं - कौन जिएगा और कौन मरेगा, यह तय करने वाले हम कौन होते हैं?" इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला ने कहा कि पीठ जीवन रक्षक चिकित्सा उपचार बंद करने के विकल्प पर विचार करेगी।

बता दें कि हरीश के माता-पिता का प्रतिनिधित्व करने वाले एमिकस क्यूरी और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुईं एएसजी ऐश्वर्या भाटी द्वारा विस्तृत दलीलें प्रस्तुत करने के बाद अदालत ने ये टिप्पणियां कीं।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान, एमिकस क्यूरी ने हरीश के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की मांग की और इसे प्राकृतिक मृत्यु को त्वरित करने का मामला बताया। वकील ने दो मेडिकल बोर्ड की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि हरीश के ठीक होने की संभावना नही है। उन्होंने कहा, "इस तरह के उपचार जारी रखना गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है।"

सब समाचार

+ और भी पढ़ें