दिल्ली के एक स्कूल में तीसरी भाषा को लेकर छात्र और स्कूल के बीच विवाद खड़ा हो गया है। छात्र ने तीसरी भाषा के तौर पर पंजाबी भाषा चुनी थी। लेकिन स्कूल में पंजाबी भाषा पढ़ाने के लिए योग्य टीचर उपलब्ध नहीं होने पर छात्र का नाम संस्कृत भाषा में दर्ज कर दिया। इसके बाद स्कूल ने उसे संस्कृत की परीक्षा देने के लिए कहा जा रहा था। छात्र ने इस मामले में राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने फिलहाल स्टूडेंट को राहत देते हुए अगली सुनवाई तक संस्कृत की परीक्षा में शामिल होने से छूट दे दी है।
