Seva Teerth: 78 साल बाद बदलेगा का प्रधानमंत्री कार्यालय का पता, संस्कृति और एडवांस टेक्नोलॉजी का बेजोड़ मेल है नया PMO

Seva Teerth New PMO: यह बदलाव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकारी ढांचे को आधुनिक बनाना और अलग-अलग दफ्तरों को एक ही बिल्डिंग में लाना है। अधिकारियों के अनुसार, यह नया परिसर भारत की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हुए आधुनिक वास्तुकला और उन्नत तकनीक से लैस है

अपडेटेड Feb 12, 2026 पर 8:27 PM
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Seva Teerth: 78 साल बाद बदलेगा का प्रधानमंत्री कार्यालय का पता

एक ऐतिहासिक फैसले में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) 78 साल बाद दिल्ली के प्रतिष्ठित साउथ ब्लॉक से बाहर जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अपना आधिकारिक कार्यालय नए बने ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट करेंगे। 1947 में आजादी के बाद से रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक देश की सत्ता का मुख्य केंद्र रहा है। यहीं से प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ रक्षा और विदेश मंत्रालय जैसे अहम मंत्रालय काम करते रहे। देश के कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले इसी इमारत में लिए गए।

यह बदलाव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकारी ढांचे को आधुनिक बनाना और अलग-अलग दफ्तरों को एक ही बिल्डिंग में लाना है।

सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स क्या है?


सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स दारा शिकोह रोड पर स्थित है और इसमें तीन आपस में जुड़े भवन हैं।

  • सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय होगा।
  • सेवा तीर्थ-2 में पहले से ही कैबिनेट सचिवालय काम कर रहा है।
  • सेवा तीर्थ-3 राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के कार्यालय के लिए निर्धारित है।

अधिकारियों के अनुसार, यह नया परिसर भारत की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हुए आधुनिक वास्तुकला और उन्नत तकनीक से लैस है। यहां ओपन फ्लोर प्लान और एकीकृत डिजाइन से विभागों के बीच बेहतर तालमेल की उम्मीद है। ‘इंडिया हाउस’ जैसे विशेष सम्मेलन कक्ष कूटनीतिक बैठकों और द्विपक्षीय वार्ताओं के लिए बनाए गए हैं।

‘सेवा तीर्थ’ नाम का मतलब है ‘सेवा का स्थान’, जो नागरिक-केंद्रित प्रशासन के संदेश को दर्शाता है। सरकार ने हाल के समय में कई सरकारी स्थलों के नाम भी इसी भावना के साथ बदले हैं।

साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का क्या होगा?

प्रधानमंत्री कार्यालय के पूरी तरह शिफ्ट होने के बाद साउथ और नॉर्थ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे युगेन भारत संग्रहालय’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां भारत की सभ्यता और इतिहास को प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन इमारतों की विरासत को समझ सकें।

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