Social Media Rules: AI फोटो और वीडियो पर केंद्र का शिकंजा! सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सरकार ला रही सख्त IT नियम

Social Media Rules: सरकार ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 में बदलावों को नोटिफाई किया है। इसमें AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बने और बदले हुए कंटेंट को फॉर्मली डिफाइन किया गया है। सोशल मीडिया कंपनियों को सरकारी या अदालती आदेशों पर अब 36 घंटे के बजाय तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी

अपडेटेड Feb 11, 2026 पर 7:31 AM
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Social Media Rules: सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रहे भ्रामक AI कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए सख्त IT नियम लागू किए हैं

Social Media Rules: सरकार ने इंटरनेट पर डीपफेक और गुमराह करने वाले AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बने कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए एक नया कानून और रिवाइज्ड गाइडलाइंस नोटिफाई की है। नए नियम के मुताबिक, अब सोशल मीडिया कंपनियों और यूजर्स दोनों पर जिम्मेदारी डाली गई है। इसमें कौन सा कंटेंट AI से बना है, ये बताना जरूरी होगा। यानी प्लेटफॉर्म और यूजर्स दोनों को भ्रामक AI कंटेंट के बारे में साफ तौर पर बतानी होगी जो असली नहीं है।

साथ ही नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट को हटाने की टाइमलाइन काफी सख्त कर दी गई है। इसके तहत, X और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म को किसी सक्षम अथॉरिटी या कोर्ट के कहने पर तीन घंटे के अंदर भ्रामक कंटेंट हटाना होगा। सरकार ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 में बदलावों को नोटिफाई किया है।

20 फरवरी से नए नियम होंगे लागू


इसमें AI से बने और बदले हुए कंटेंट को फॉर्मली डिफाइन किया गया है। ये नए नियम 20 फरवरी, 2026 से लागू होंगे। सोशल मीडिया कंपनियों को सरकारी या अदालती आदेशों पर अब 36 घंटे के बजाय तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। इन बदलावों में ऑडियो, विज़ुअल या ऑडियोविज़ुअल जानकारी और बनावटी रूप से तैयार की गई जानकारी को डिफाइन किया गया है।

इसमें AI द्वारा असली या ऑथेंटिक दिखने के लिए बनाया या बदला गया कंटेंट शामिल है। रूटीन एडिटिंग, कंटेंट एन्हांसमेंट और अच्छी नीयत से किया गया एजुकेशनल या डिजाइन का काम इस डेफिनिशन से बाहर रखा गया है।

क्या है नए नियम का मकसद?

मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) ने नोटिफिकेशन में कहा कि मुख्य बदलावों में बनाए गए कंटेंट को जानकारी मानना ​​शामिल है। IT नियमों के तहत गैर-कानूनी कामों का पता लगाने के लिए AI से बने कंटेंट को दूसरी जानकारी के बराबर माना जाएगा।

नए नियम की बड़ी बातें

  • नोटिफिकेशन में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अब सरकार या कोर्ट के ऑर्डर पर 36 घंटे के बजाय तीन घंटे के अंदर कार्रवाई करनी होगी। इसके अलावा, यूजर की शिकायतों को दूर करने का टाइम भी कम कर दिया गया है।
  • नियमों में AI कंटेंट की लेबलिंग जरूरी है। जो प्लेटफॉर्म बनावटी कंटेंट बनाने या शेयर करने में मदद करते हैं, उन्हें यह पक्का करना होगा कि ऐसे कंटेंट पर साफ और खास लेबल लगे हों। जहां तकनीकी रूप से मुमकिन हो, उसे लगातार मेटाडेटा या आइडेंटिफायर से जोड़ा जाना चाहिए।
  • नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि एक बार AI लेबल या मेटाडेटा लग जाने के बाद इंटरमीडियरी उन्हें हटा या छिपा नहीं सकते।
  • नए फ्रेमवर्क के तहत AI से बने या AI से बदले हुए फोटो, वीडियो या ऑडियो अपलोड करने वाले किसी भी व्यक्ति को यह बताना होगा कि कंटेंट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके बनाया या बदला गया है।
  • फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी AI से बने कंटेंट पर साफ लेबल लगाना होगा। ताकि यूजर्स को यह गलतफहमी न हो कि यह किसी असली व्यक्ति या असली घटना को दिखाता है।

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