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Stray Dogs Case: 'भारी मुआवजा देने का निर्देश देंगे'; आवारा कुत्तों के काटने पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

Stray Dogs Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं के लिए उनको खाना खिलाने वालों को भी जिम्मेदार और जवाबदेह ठहराया जाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्यों को कुत्ते के काटने से पीड़ित लोगों को मुआवजा देने के लिए कहा जाएगा क्योंकि उन्होंने पिछले पांच सालों में नियमों को लागू करने के संबंध में कुछ नहीं किया

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jan 13, 2026 पर 3:31 PM
Stray Dogs Case: 'भारी मुआवजा देने का निर्देश देंगे'; आवारा कुत्तों के काटने पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
Stray Dogs Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए राज्यों को भारी मुआवजा देने का निर्देश देंगे

Stray Dogs Case: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 जनवरी) को पिछले पांच वर्षों में आवारा पशुओं से संबंधित नियमों के क्रियान्वयन के लिए कोई कदम नहीं उठाए जाने पर चिंता व्यक्त कीशीर्ष अदालत ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए राज्यों को भारी मुआवजा देने का आदेश देगा। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए कुत्ता प्रेमियों और उन्हें खाना खिलाने वालों को भी जिम्मेदार और जवाबदेह ठहराया जाएगा।

जस्टिस नाथ ने कहा, "कुत्तों के काटने से बच्चों या बुजुर्गों की मृत्यु या चोट के हर मामले के लिए हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा देने की मांग करेंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले पांच वर्षों में नियमों के कार्यान्वयन के संबंध में कुछ नहीं किया है। साथ ही, इन आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी। अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है तो आप उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते? ये कुत्ते इधर-उधर क्यों घूमते हैं, लोगों को काटते हैं और डराते हैं?"

वहीं, जस्टिस मेहता ने जस्टिस नाथ के विचारों से सहमति जताते हुए कहा, "जब कुत्ते 9 साल के बच्चे पर हमला करते हैं तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? वह संगठन जो उन्हें खाना खिला रहा है? आप चाहते हैं कि हम इस समस्या से आंखें मूंद लें।" सुप्रीम कोर्ट 7 नवंबर, 2025 के अपने उस आदेश में संशोधन के अनुरोध वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इसमें अधिकारियों को सार्वजनिक स्थानों और सड़कों से इन आवारा जानवरों को हटाने का निर्देश दिया गया था।

जस्टिस विक्रमनाथ के अनुसार, जो लोग कहते हैं कि वे कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई के दौरान कहा, "बच्चों या बुजुर्गों को कुत्ते के काटने, मौत या चोट लगने के हर मामले में हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा देने के लिए कहेंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले पांच सालों में नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया। साथ ही, इन आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर भी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी।"

जस्टिस नाथ ने कहा, "अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है, तो आप उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते? ये कुत्ते इधर-उधर क्यों घूमें, लोगों को काटें और डराएं?" बेंच की यह टिप्पणी तब आई जब वकील मेनका गुरुस्वामी ने आवारा कुत्तों के मुद्दे को एक भावनात्मक मामला बताया।

पीठ ने उनसे कहा, "अब तक भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिख रही हैं। मैं 2011 से जज हूं। लेकिन इंसानों के लिए इतनी जोशीली दलीलें कभी नहीं सुनीं।" इस पर गुरुस्वामी ने जवाब दिया, "ऐसा नहीं है। मैं इंसानों के बारे में भी उतनी ही चिंतित हूं।" यह घटनाक्रम तब हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 7 नवंबर को शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया।

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