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विकास के लिए पैसा कहां से आएगा? सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में फ्रीबीज बांटने पर जताई नाराजगी, तमिलनाडु सरकार को थमाया नोटिस

SC on Freebies: कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से साफ पूछा कि इन वादों के लिए पैसा कहां से आएगा? “ऐसी नीतियों के कारण विकास के लिए एक पैसा भी नहीं बचता,” कोर्ट ने कहा। साथ ही यह भी जोड़ा कि यह समस्या सिर्फ एक राज्य की नहीं, बल्कि लगभग सभी राज्यों की है

Shubham Sharmaअपडेटेड Feb 19, 2026 पर 2:41 PM
विकास के लिए पैसा कहां से आएगा? सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में फ्रीबीज बांटने पर जताई नाराजगी, तमिलनाडु सरकार को थमाया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में फ्रीबीज बांटने पर जताई नाराजगी, तमिलनाडु सरकार को थमाया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव से पहले राज्यों की ओर से दी जाने वाली “फ्री बीज” यानी फ्री सुविधाओं पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने पूछा कि अगर सरकारें मुफ्त खाना, मुफ्त बिजली और सीधे खाते में पैसा देती रहेंगी, तो विकास के लिए पैसा कहां से आएगा? यह मामला तब उठा जब चुनावी राज्य तमिलनाडु की पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने प्रस्ताव रखा कि वह सभी उपभोक्ताओं को, उनकी आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, मुफ्त बिजली देगी। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कहा कि पूरे देश में कैसी संस्कृति बनाई जा रही है? अगर सुबह से मुफ्त खाना, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली और अब सीधे खाते में कैश ट्रांसफर दिया जाएगा, तो लोग काम क्यों करेंगे?

उन्होंने कहा कि जो लोग सच में गरीब हैं और बिल नहीं दे सकते, उनकी मदद करना सरकार का कर्तव्य है। लेकिन जो लोग पैसे देने में सक्षम हैं, उन्हें भी बिना फर्क किए मुफ्त सुविधाएं देना सही नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि कई बच्चे पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पाते, वहां सरकार को मदद करनी चाहिए। लेकिन अगर अमीर लोगों तक भी मुफ्त सुविधाएं पहुंच रही हैं, तो क्या अब राज्यों को अपनी नीतियों पर दोबारा विचार नहीं करना चाहिए?

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