पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर राज्य में उथल-पुथल मचा हुआ है। तृणमूल कांग्रेस शुरुआत से ही माइक्रो ऑब्जर्वर की भूमिका पर सवाल उठाती आई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद SIR और माइक्रो ऑब्जर्वर के मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया है। उनका सवाल था कि जब दूसरे राज्यों में इतनी बड़ी संख्या में माइक्रो ऑब्जर्वर नहीं लगाए गए, तो फिर बंगाल में ही ऐसा क्यों किया जा रहा है।
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 फरवरी) को अहम निर्देश दिया हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील श्याम दीवान ने आशंका जताई कि मौजूदा हालात में बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि नियमों के अनुसार माइक्रो ऑब्जर्वर सिर्फ मतदान के दिन बूथ पर निगरानी के लिए होते हैं, लेकिन बंगाल में उन्हें इससे कहीं ज्यादा अधिकार दिए जा रहे हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारी की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर अहम टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने साफ कहा कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अंतिम फैसला ERO का ही होना चाहिए, न कि माइक्रो ऑब्जर्वर का। उन्होंने कहा, "अगर सक्षम अधिकारी निर्णय लेते हैं, तो कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। माइक्रो ऑब्जर्वर अंतिम फैसला नहीं कर सकते।" साथ ही ममता सरकार को आदेश दिया कि 8,550 ग्रुप-बी अधिकारियों को SIR से जुड़े कामों के लिए चुनाव आयोग (ECI) के अधीन रखा जाए, ताकि वे अपने काम को सही ढंग से कर सकें।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कुछ स्क्रीनशॉट भी देखे, जिससे यह देखने को मिला कि कई जगह माइक्रो ऑब्जर्वर जरूरत से ज्यादा दखल दे रहे हैं। कोर्ट ने इस पर चिंता जताई और स्पष्ट किया कि एक अतिरिक्त चुनावी ढांचा खड़ा नहीं किया जा सकता। यानी, माइक्रो ऑब्जर्वर ERO के ऊपर नहीं हो सकते।
वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में ERO या AERO द्वारा मंजूरी दिए जाने के बावजूद माइक्रो ऑब्जर्वर आपत्ति कर रहे हैं, जिससे प्रक्रिया अटक रही है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि ये आरोप निराधार हैं और अंतिम अधिकार हमेशा ERO के पास ही रहेगा।
इस निर्देश को बंगाल की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस पहले से आरोप लगाती रही है कि SIR के जरिए वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हो रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि फर्जी और अवैध नामों को हटाना जरूरी है।