उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में शराब की बिक्री और पैकेजिंग को लेकर एक अहम जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सुनवाई की। सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत कई पक्षों को नोटिस जारी भी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से इस याचिका को लेकर जवाब मांगा है। कोर्ट ने टेट्रा पैक और सैशे जैसी पैकेजिंग में शराब की बिक्री पर तुरंत रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग संगठन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने के दौरान यह जवाब मांगा गया और साथ ही इस पर सुनवाई के लिए सहमति भी जताई।
कोर्ट ने पैकेजिंग को लेकर जताई नाराजगी
अदालत ने कहा कि इस तरह की पैकेजिंग लोगों को भ्रमित कर सकती है और कम उम्र में शराब पीने की आदत को बढ़ावा दे सकती है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार और कई राज्यों के आबकारी विभागों को नोटिस जारी किया है। यह याचिका ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग’ नाम की एक गैर-लाभकारी संस्था ने दायर की है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “यह बहुत भ्रामक है। नोटिस जारी किया जाता है।”
याचिकाकर्ताओं की तरफ से अदालत में पेश हुए वकील विपिन नायर ने कहा कि शराब के कई उत्पादों पर साफ चेतावनी नहीं लिखी होती और उनकी पैकेजिंग इस तरह बनाई जाती है कि वे फलों के जूस जैसे लगते हैं। विपिन नायर ने कोर्ट से कहा, “तंबाकू उत्पादों की तरह इन पर कोई चेतावनी नहीं होती। ये पैक देखने में फलों के जूस जैसे लगते हैं, लेकिन इनके अंदर वोडका होती है। इन पर सेब की तस्वीरें होती हैं और ‘चिली मैंगो वोडका’ जैसे नाम लिखे होते हैं।”
कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिए ये निर्देश
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक समान नीति बनाए, ताकि इस तरह की पैकेजिंग में शराब की बिक्री पर रोक लगाई जा सके। याचिका में यह मांग भी की गई है कि “बोतलबंदी” की एक साफ और तय परिभाषा बनाई जाए। इसमें कहा गया है कि शराब सिर्फ कांच की बोतलों या ऐसे कंटेनरों में ही बेची जाए, जिन्हें आसानी से पहचाना जा सके।
टेट्रा पैक और छोटे सैशे में बिक रहे हैं शराब
संगठन का कहना है कि टेट्रा पैक और छोटे सैशे में शराब बेचने से उसे छिपाना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान हो जाता है। इससे कम उम्र के लोगों में शराब पीने की आदत बढ़ सकती है, चलती गाड़ियों में शराब पीने की घटनाएं बढ़ सकती हैं, राज्यों की सीमाओं के पार शराब की तस्करी हो सकती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच सकता है। याचिका में कहा गया है कि फलों के जूस जैसी दिखने वाली शराब की पैकेजिंग लोगों को भ्रमित करती है। इससे शराब को आसानी से छिपाया और कहीं भी ले जाया जा सकता है।
याचिका के मुताबिक, इस तरह की पैकेजिंग कम उम्र के लोगों को शराब पीने के लिए आकर्षित करती है। साथ ही यह सार्वजनिक जगहों पर शराब पीने, नशे में गाड़ी चलाने और राज्यों की सीमाओं के पार शराब की तस्करी जैसी समस्याओं को भी बढ़ावा देती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इन उत्पादों की डिजाइन और मार्केटिंग जानबूझकर इस तरह की जाती है, जिससे उपभोक्ता आसानी से गुमराह हो जाएं।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने टेट्रा पैक में बिक रही शराब को लेकर चिंता जताई थी। अदालत ने कहा था कि इस तरह की पैकेजिंग बिल्कुल फलों के जूस के डिब्बों जैसी दिखाई देती है। यह टिप्पणी दो व्हिस्की ब्रांडों के बीच चल रहे ट्रेडमार्क विवाद की सुनवाई के दौरान की गई थी। उस मामले में दोनों पक्षों की ओर से दायर याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई कर रहा था।