Bakrid 2026: ईद-उल-अजहा यानी बकरीद 2026 से पहले पश्चिम बंगाल के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सार्वजनिक रूप से अपने समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे कुर्बानी के लिए गायें न खरीदें। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली बंगाल सरकार द्वारा पशुओं की हत्या पर रोक लगाने वाले नोटिफिकेशन का भी समर्थन किया है। कोलकाता की मशहूर नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना शफीक कासमी ने अपनी अपील में बिल्कुल साफ-साफ कहा है कि इस बार बकरीद पर कुर्बानी के लिए गाय न खरीदें।
शफीक कासमी ने कहा कि हमें बीफ क्यों खाना चाहिए? उन्होंने कहा कि हिंदू लोग गाय की पूजा करते हैं। हम इसके बजाय बकरियों और भेड़ों की कुर्बानी दे सकते हैं। 'हिंदुस्तान टाइम्स' के मुताबिक शफीक कासमी ने कहा, "मैं अपने मुस्लिम भाइयों से अपील करता हूं कि वे गायों की कुर्बानी न दें। बल्कि, उन्हें बीफ खाना पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "केंद्र सरकार को गाय को एक संरक्षित राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए। दुर्भाग्य से हमारे हिंदू भाइयों को ही इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। क्योंकि वे ही पशुओं का पालन-पोषण करते हैं और ईद के दौरान मुसलमानों को पशुओं के झुंड बेचते हैं। इसमें लाखों रुपए का लेन-देन होता है।"
इसके अलावा बंगाल के सबसे प्रमुख इस्लामी तीर्थस्थल फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी ने भी ऐसी ही अपील की है। उन्होंने साफ तौर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों से गाय की कुर्बानी ने देने की अपील की है। हुगली जिले में स्थित फुरफुरा शरीफ पश्चिम बंगाल का सबसे ज्यादा विजिट किया जाने वाला इस्लामी तीर्थ स्थल है।
बंगाल सरकार का नोटिफिकेशन जारी
मुस्लिम धर्मगुरुओं का यह रुख राज्य के गृह विभाग द्वारा 13 मई को जारी एक नोटिफिकेशन के बाद आया है। इस विभाग की कमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के हाथों में है। पश्चिम बंगाल सरकार ने एक नोटिफिकेशन के जरिए गाइडलाइंस जारी किए हैं। इनमें अधिकारियों से "फिटनेस सर्टिफिकेट" हासिल किए बिना पशु वध पर रोक लगाई गई है। साथ ही निर्देशों का पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पशु वध करने पर "सख्त पाबंदी" होगी। सरकार ने कहा कि ये दिशानिर्देश 'पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950' के अनुरूप हैं। यह साल 2018 तथा 2022 के हाई कोर्ट के आदेशों के आधार पर जारी किए गए हैं।
पश्चिम बंगाल में नई बीजेपी सरकार की ओर से लगाए गए विभिन्न प्रतिबंधों के मद्देनजर बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई। इनमें अगले सप्ताह ईद-उल-अजहा (बकरीद) मनाने के लिए पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 की धारा 12 के तहत छूट देने का अनुरोध किया गया है।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने 28 मई को ईद-उल-अजहा का त्योहार मनाने का ऐलान किया। ईद उल फित्र के विपरीत बकरीद चांद दिखने के 10वें दिन मनाई जाती है। ईद उल अज़हा या बकरीद का त्योहार, ईद उल फित्र के दो महीने नौ दिन बाद मनाया जाता है। जामा मस्जिद के नायब शाही इमाम सैयद शाबान बुखारी ने एक वीडियो बयान में 28 मई को बकरीद मनाए जाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि देश के किसी हिस्से से चांद नज़र आने की सूचना नहीं है।
इस्लामी मान्यता के अनुसार, पैगंबर इब्राहिम अपने बेटे इस्माइल को इसी दिन अल्लाह के हुक्म पर कुर्बान करने जा रहे थे, तो अल्लाह ने उनके बेटे को जीवनदान दे दिया। वहां एक पशु की कुर्बानी दी गई थी, जिसकी याद में यह पर्व मनाया जाता है। तीन दिन चलने वाले त्योहार में मुस्लिम समुदाय के लोग अपनी हैसियत के हिसाब से उन पशुओं की कुर्बानी देते हैं, जिन्हें भारतीय कानूनों के तहत प्रतिबंधित नहीं किया गया है।