सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार दोपहर कहा कि बिहार के मतदाता, जो इस साल के आखिर में होने वाले चुनाव से पहले वोटर लिस्ट से अपने नाम को बाहर रखे जाने को चुनौती दे रहे हैं, वे निवास के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड पेश कर सकते हैं। न्यायालय ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह सरकार की ओर से जारी पहचान पत्र को 11 अन्य पहचान पत्रों की लिस्ट में शामिल करे। साथ ही शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग के बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम में बदलाव करने से इनकार कर दिया और कहा कि भारी प्रतिक्रिया मिलने पर चुनाव आयोग समयसीमा बढ़ाने पर विचार कर सकता है।
