Surajkund Mela tragedy: सूरजकुंड में जिस इंस्पेक्टर की गई जान, उन्हें 2020 में मिला था मेडल, मार्च में होने वाले थे रिटायर

Surajkund Mela tragedy: सूरजकुंड मेले में 7 फरवरी को बिजली से चलने वाला एक बड़ा झूला टूट कर गिरने से ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की मौत हो गई और 11 अन्य लोग घायल हो गए। राज्यपाल ने 2019-20 में जगदीश को पुलिस मेडल से सम्मानित किया था

अपडेटेड Feb 08, 2026 पर 3:19 PM
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Surajkund Mela tragedy: सूरजकुंड झूले हादसे में मारे गए इंस्पेक्टर को 2020 में पुलिस मेडल मिला था

Surajkund Mela tragedy: हरियाणा के फरीदाबाद में आयोजित सूरजकुंड मेले के मैदान में शनिवार (7 फरवरी) को एक विशाल झूला बीच हवा में टूटकर गिर गया। इसके बाद लोगों को बचाने की कोशिश में ड्यूटी पर तैनात 58 वर्षीय पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की जान चली गई। हरियाणा के राज्यपाल ने 2019-20 में जगदीश को पुलिस पदक से सम्मानित किया था। शनिवार शाम करीब छह बजे जब झूला अचानक झुककर जमीन पर गिरा, तब उसमें लगभग 19 लोग झूल रहे थे। उनमें से 11 लोग घायल हो गए।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 1989 में हरियाणा सशस्त्र पुलिस में शामिल हुए और 36 साल की सेवा पूरी करने के बाद मार्च में रिटायर होने वाले प्रसाद ने झूले में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश में वीरता दिखाई। लेकिन इस प्रक्रिया में वे गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई। इस बीच, जिला प्रशासन ने सूचित किया कि 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महोत्सव रविवार को जारी रहेगा। हालांकि आगे की जांच होने तक झूला क्षेत्र बंद रहेगा।

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल ने शनिवार रात को बहादुर पुलिस इंस्पेक्टर के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे और उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की। अधिकारी ने प्रसाद को शहीद का दर्जा देते हुए दूसरों की जान बचाने के प्रयास में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले अधिकारी की सराहना की। हरियाणा के पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने कहा कि घायल लोग अब खतरे से बाहर हैं।


अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में एक समिति इस दुर्घटना की जांच करेगी। अधिकारियों ने बताया कि झूला विक्रेता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। प्रसाद के अचानक निधन से मथुरा जिले के उनके पैतृक गांव डेंगरा में लोगों को गहरा सदमा लगा। प्रसाद के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियां एवं एक बेटा हैं। तीनों बच्चे अभी पढ़ाई कर रहे हैं। सभी अविवाहित हैं।

प्रसाद के एक भाई प्रदीप टीचर हैं। वह अपने पिता सूरजमल और माता शांति देवी के साथ गांव में रहते हैं। इसके अलावा उनके दूसरे भाई सतीश चंद्र बल्लभगढ़ की एक रसायन फैक्टरी में काम करते हैं। जबकि चंद्रभान सिंह फरीदाबाद की एक मोटर कंपनी में कार्यरत हैं।

प्रदीप ने पीटीआई को बताया, "हमें शनिवार रात आठ बजे यह खबर मिली। उनकी (प्रसाद की) पत्नी सुधा अपनी दो बेटियों निधि एवं दीप्ति और बेटे गौरव के साथ सोनीपत पुलिस लाइंस के सरकारी आवास में रहती हैं। मेरे भाई को 2019-20 में राज्यपाल द्वारा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।"

सुरक्षा दावों पर उठे सवाल

सूरजकुंड मेले में झूले से जुड़ी यह तीसरी ऐसी दुर्घटना थी, जिससे आयोजकों के सुरक्षा दावों पर सवाल उठ रहे हैं। साल 2002 में एक मौत और 2019 में एक व्यक्ति के घायल होने के बावजूद शनिवार को एक अन्य हादसा हुआ। वर्ष 2002 में सूरजकुंड मेले में एक युवक की झूले पर झूलते हुए मौत हो गई थी। उस समय झूलों को कुछ वर्षों के लिए बंद कर दिया गया था।

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वर्ष 2019 में एक दुर्घटना में एक युवक घायल हो गया, जिसके बाद झूलों को फिर से बंद कर दिया गया। लेकिन उनसे होने वाली आय को ध्यान में रखते हुए उन्हें दोबारा शुरू कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, झूले लगाने के लिए सख्त नियम लागू हैं। इसके लिए प्रतिदिन निरीक्षण करना आवश्यक है।

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