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तमिलनाडु के सीएम विजय का बड़ा फैसला! एक झटके में शराब की 717 दुकानें बंद, क्या है वजह?

Tamil Nadu Liquor Ban: तमिलनाडु के सीएम सी. जोसेफ विजय ने राज्य में तमाम शिक्षण संस्थानों,अस्पताल, धार्मिक स्थलों और बस स्टैंड के 500 मीटर के अंदर शराब की दुकान को दो सप्ताह के भीतर बंद करने का आदेश दिया है। विजय ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए तमिलनाडु की कमान संभाल लिया है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड May 12, 2026 पर 10:04 AM
तमिलनाडु के सीएम विजय का बड़ा फैसला! एक झटके में शराब की 717 दुकानें बंद, क्या है वजह?
Tamil Nadu Liquor Ban: तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री जोसेफ विजय बड़ा फैसला लिया है

Tamil Nadu Liquor Ban: तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने पूरे राज्य में मंदिरों, स्कूलों, अस्पताल और बस स्टैंड से 500 मीटर के दायरे में आने वाली 717 सरकारी शराब की दुकानों को बंद करने का आदेश दिया है। ये दुकानें TASMAC यानी तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन चलाता है। एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि राज्य में तमाम शिक्षण संस्थानों,अस्पताल, धार्मिक स्थलों और बस स्टैंड के पास मौजूद शराब की दुकानें दो सप्ताह के अंदर बंद कर दी जाएंगी। यह विजय का पहला बड़ा आदेश है।

यह कदम उनके उन वादों के बीच आया है, जिनमें उन्होंने सामाजिक कल्याण और जनता के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही थी। मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया है, "आम जनता के कल्याण को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने पूजा स्थलों, शिक्षण संस्थानों और बस स्टैंड से 500 मीटर के दायरे में स्थित 717 शराब की खुदरा दुकानों को दो हफ्तों के अंदर बंद करने का आदेश जारी किया है।"

सरकार ने बताया, "TASMAC फिलहाल राज्य में 4,765 शराब की दुकानें चला रहा है। इनमें से 276 दुकानें पूजा स्थलों के पास, 186 शिक्षण संस्थानों के पास और 255 बस स्टैंड के पास स्थित हैं।" TASMAC शराब की बिक्री से राज्य के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा आता है। 2025 में कुल रेवेन्यू 48,000 करोड़ रुपये से ज्यादा था। विजय के 'नशामुक्त' तमिलनाडु के वादे की दिशा में यह पहला बड़ा कदम है।

अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों से पहले TASMAC की दुकानें प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रडार में थीं। पिछले साल केंद्रीय एजेंसी ने निगम और उससे जुड़ी संस्थाओं द्वारा कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों के सिलसिले में पूरे राज्य में कई जगहों पर छापे मारे थे। उस समय द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सत्ता में थी। सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर गई। पिछले साल मई में कोर्ट ने ED द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को लांघने के रवैये पर सख़्त नाराजगी जताई थी।

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