Tamil Nadu politics: तमिलनाडु की राजनीति से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के बागी सीनियर विधायकों एस.पी. वेलुमणि और सी.वी. षणमुगम के नेतृत्व वाले गुट ने सत्तारूढ़ सीएम सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। अन्नाद्रमुक के विधायक वेलुमणि ने मंगलवार (12 मई) को इसकी घोषणा करते हुए AIADMK की महापरिषद की बैठक तत्काल बुलाने की मांग की।
षणमुगम ने कहा कि अन्नाद्रमुक प्रमुख पलानीस्वामी सरकार बनाने के लिए पूर्व सीएम एमके स्टालिन की पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के साथ गठबंधन करना चाहते थे। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे आज दोपहर मुख्यमंत्री विजय से मिलकर उनकी सरकार को समर्थन देने के लिए पत्र सौंपेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि AIADMK महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी सरकार बनाने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) को समर्थन देना चाहते थे।
उन्होंने आगे कहा, "हमने उनके (पलानीस्वामी के) इस फैसले का विरोध किया क्योंकि अन्नाद्रमुक का गठन ही द्रमुक को हराने के लिए किया गया था।" षणमुगम ने यह भी मांग की कि पलानीस्वामी को तुरंत पार्टी की महापरिषद की बैठक बुलानी चाहिए।
आज विजय से करेंगे मुलाकात
वरिष्ठ नेता षणमुगम ने पत्रकारों से कहा कि अन्नाद्रमुक के एक धड़े के विधायक तमिलनाडु सरकार को समर्थन देने के लिए मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात करेंगे। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद AIADMK विधायकों ने महत्वपूर्ण फ्लोर टेस्ट से पहले सरकार बनाने में विजय की TVK को समर्थन देगी। पत्रकारों से बात करते हुए AIADMK नेता सी.वी. षणमुगम ने कहा कि पार्टी फिलहाल बिना किसी गठबंधन के खड़ी है, जो विधानसभा चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी के साथ संबंध टूटने का संकेत है।
उन्होंने यह भी कहा कि AIADMK प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी सरकार बनाने के लिए DMK के साथ गठबंधन करना चाहते थे। सी.वी. षणमुगम ने कहा, "हमने TVK को अपना समर्थन देने का फ़ैसला किया, जो विजयी रही। हमने इस पार्टी की स्थापना DMK के खिलाफ की थी। 53 सालों से हमारी राजनीति DMK के खिलाफ रही है। इस इतिहास को देखते हुए एक प्रस्ताव रखा गया था जिसमें सुझाव दिया गया था कि DMK के समर्थन से AIADMK की सरकार बनाई जाए।"
उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, हमारे ज्यादातर सदस्यों ने इसे अस्वीकार कर दिया और इसका विरोध किया। अगर हम DMK के साथ गठबंधन करते, तो AIADMK का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता। उन्होंने ऐसी स्थिति को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। हम अभी बिना किसी गठबंधन के खड़े हैं। और अब हमारा ध्यान अपनी पार्टी को फिर से मजबूत और जीवंत बनाने पर होना चाहिए। आख़िरकार हमने TVK को अपना समर्थन देने का फैसला किया, जो विजयी रही।"
करारी हार के बाद AIADMK में दरार
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद AIADMK के भीतर की दरारें खुलकर सामने आ गईं। वरिष्ठ नेता सी.वी. षणमुगम के नेतृत्व में पार्टी के कुछ विधायकों ने प्रोटेम स्पीकर एम.वी. करुपैया को एक पत्र सौंपकर पूर्व मंत्री एस.पी. वेलुमणि को AIADMK विधायक दल के नेता के रूप में नियुक्त करने की मांग की। इससे पहले, कथित तौर पर कुछ विधायकों ने मांग की थी कि AIADMK के खराब चुनावी प्रदर्शन के बाद एडप्पादी के. पलानीस्वामी अपने पद से हट जाएं। AIADMK ने 234 में से 167 सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल 47 सीटें ही जीत पाई।
चुनावी नतीजों के बाद पलानीस्वामी की अध्यक्षता में विधायकों की कई बैठकें आयोजित की गई। AIADMK के कई वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एवं उनका समर्थन करने वाले विधायक पलानीस्वामी द्वारा बुलाई गई बैठकों से दूर रहे। ANI ने AIADMK के पूर्व नेता के.सी. पलानीसामी के हवाले से कहा, "पार्टी के भीतर साफ तौर पर फूट पड़ गई है। कई विधायक नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं। अगर पलानीस्वामी नेता बने रहते हैं, तो इस बात की संभावना है कि कुछ विधायक TVK को अपना समर्थन दे सकते हैं।"