Vice President Polls: तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के महासचिव और आंध्र प्रदेश के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश ने मंगलवार (19 अगस्त) को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राधाकृष्णन को अपना समर्थन व्यक्त किया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि TDP नेताओं और सांसदों के साथ राधाकृष्णन से मिले लोकेश ने कई राज्यों के राज्यपाल के रूप में उनके व्यापक प्रशासनिक अनुभव की सराहना की।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राधाकृष्णन का अनुशासन, दृढ़ता और सेवाभावी नेतृत्व युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगा और आने वाले वर्षों में राष्ट्र को लाभान्वित करेगा। वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल राधाकृष्णन 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए NDA के उम्मीदवार हैं। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 21 अगस्त है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने घोषणा की है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी दलों के संयुक्त उम्मीदवार हैं। साथ ही उन्होंने देश के दूसरे सबसे बड़े पद के लिए होने वाले आगामी चुनाव को एक वैचारिक लड़ाई बताया।
रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और गोवा के पहले लोकायुक्त हैं। वह 21 अगस्त को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। राज्यसभा में विपक्ष के नेता खड़गे ने कहा कि रेड्डी भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रगतिशील न्यायविदों में से एक हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को NDA के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन के सार्वजनिक जीवन में किए गए कार्यों की प्रशंसा की। साथ ही विपक्ष सहित सभी दलों से सर्वसम्मति से उन्हें चुनने की अपील की। राधाकृष्णन को सत्तारूढ़ गठबंधन के सांसदों की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी के कई सहयोगी दलों सहित शीर्ष नेताओं ने सम्मानित किया।
राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपना नामांकन बुधवार को दाखिल कर सकते हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि पीएम मोदी ने अपने संबोधन में विभिन्न दलों, विशेषकर विपक्ष से राधाकृष्णन का समर्थन करने की अपील की। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनका चुनाव सर्वसम्मति से हो।
पीएम मोदी ने तमिलनाडु के अनुभवी बीजेपी नेता एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल राधाकृष्णन का NDA सांसदों से परिचय कराया। साथ ही उनके लंबे सार्वजनिक जीवन जिक्र किया, जिसमें उन्होंने विभिन्न पदों पर कुशलतापूर्वक कार्य किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की संसद या अपने मंत्रिमंडल को विश्वास में लिए बिना पाकिस्तान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए आलोचना की। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कहा कि नेहरू ने देश के हित की परवाह किए बिना अपनी छवि चमकाने के लिए ऐसा किया था।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को 80 प्रतिशत से अधिक जल का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद मोदी सरकार ने इस संधि को स्थगित कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार उस दौर के पापों को धो रही है।