टेलीकॉम ग्राहकों की शिकायतों का समाधान आसान बनाने के लिए टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने नया प्रस्ताव रखा है। ट्राई ने ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म को मजबूत करने का प्रस्ताव रखा है। कंज्यूमर शिकायत के समाधान की रेटिंग कर सकेंगे। अगर कंपनी को खराब रेटिंग मिलती है,तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इस पर पूरी जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज संवाददाता असीम मनचंदा ने बताया कि टेलीकॉम कंज्यूमर की शिकायत पर कार्रवाई आसान होगी य़ खराब सेवा,गलत बिल,रोमिंग से जुड़ी हुई शिकायतों की तेजी से सुनवाई होगी।
ग्राहकों से खराब रेटिंग पर कंपनी पर जुर्माना संभव
TRAI के मुताबिक सभी टेलीकॉम कंपनियों को अपने वेबसाइट,मोबाइल ऐप,वेब पोर्टल और चैटबॉट पर स्पष्ट शिकायत दर्ज करने की सुविधा देनी होगी। इसके साथ ही कंपनियों को ग्राहकों को उनकी शिकायत पर हुई कार्रवाई और समाधान की स्थिति की नियमित जानकारी भी देनी होगी। शिकायत का समाधान होने के बाद ग्राहकों को रेटिंग देनी होगी। खराब रेटिंग मिलने पर कंपनी पर जुर्माना संभव है।
कुल जुर्माना एक तिमाही में 50 लाख रुपये से नहीं होगा ज्यादा
TRAI के ड्रॉफ्ट नियमों के मुताबिक अगर कोई शिकायत गलत तरीके से बंद की जाती है या संतोषजनक तरीके से दूर नहीं होती तो कंपनी पर प्रति शिकायत 1000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं,अगर अपील को गलत तरीके से खारिज किया जाता है,तो प्रति मामले पर 5000 रुपये का जुर्माना लगेगा। टेलीकॉम कंपनियों पर पेनल्टी बढ़ाने का प्रस्ताव है। हालांकि,किसी भी टेलीकॉम सेवा सेक्टर में कुल जुर्माना एक तिमाही में 50 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होगा।
टेक्स्ट लिखकर या वॉइस नोट भेजकर की जा सकेगी शिकायत
TRAI चाहता है कि ग्राहक आसानी से अपनी शिकायत दर्ज कर सकें,सेवा अनुरोध भेज सकें और सवाल पूछ सकें। इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों को अपने ऐप और वेबसाइट पर अलग-अलग कैटेगरी देनी होंगी। अगर ग्राहक को सही विकल्प नहीं मिलता तो वह टेक्स्ट लिखकर या वॉइस नोट भेजकर अपनी समस्या बता सकेगा इससे शिकायत प्रक्रिया और आसान होने की उम्मीद है।
5 जून 2026 तक मांगे गए सुझाव
यह प्रस्ताव Telecom Consumers Complaint Redressal Regulation, 2026 के तहत लाया गया है। TRAI ने इस ड्रॉफ्ट रूल पर लोगों और कंपनियों से सुझाव मांगे हैं। इसके लिए 5 जून 2026 तक की डेड लाइन तय की गई है।
ट्राई के इस कदम को टेलीकॉम सेक्टर में उपभोक्ता हितों की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। इससे कंपनियों पर बेहतर ग्राहक सेवा देने का दबाव बढ़ेगा और उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतों के समाधान में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है।