तमिलनाडु में TVK सरकार की तैयारी: VCK और IUML के समर्थन से, जानिए विजय के आंकड़े कैसे बन रहे हैं?

TVK महासचिव अधव अर्जुना ने वीसीके का समर्थन पत्र दिखाते हुए कहा कि पार्टी अब विजय के साथ खड़ी है। VCK विधायक दल के नेता वन्नी अरासु ने पत्र में लिखा कि पार्टी अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन के निर्देश पर उनके दोनों विधायक टीवीके सरकार को समर्थन देंगे। इसके थोड़ी देर बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने भी TVK को समर्थन दे दिया

अपडेटेड May 09, 2026 पर 6:56 PM
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तमिलनाडु में TVK सरकार की तैयारी: VCK और IUML के समर्थन से, जानिए विजय के आंकड़े कैसे बन रहे हैं?

तमिलनाडु में सरकार बनाने की कोशिश कर रहे विजय को शनिवार को बड़ी राजनीतिक राहत मिली। विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) ने उनकी पार्टी TVK को “बिना शर्त समर्थन” देने का ऐलान कर दिया। राज्य में पिछले कई दिनों से राजनीतिक गतिरोध बना हुआ था, क्योंकि विजय के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 विधायकों का समर्थन नहीं था। इसी वजह से उन्हें लगातार तीन दिनों में तीन बार राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मिलना पड़ा था।

खबरें थीं कि वीसीके समर्थन के बदले डिप्टी सीएम पद चाहती थी। लेकिन आखिरकार पार्टी ने बिना किसी शर्त के समर्थन देने का फैसला किया। TVK महासचिव अधव अर्जुना ने वीसीके का समर्थन पत्र दिखाते हुए कहा कि पार्टी अब विजय के साथ खड़ी है। VCK विधायक दल के नेता वन्नी अरासु ने पत्र में लिखा कि पार्टी अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन के निर्देश पर उनके दोनों विधायक टीवीके सरकार को समर्थन देंगे।

इसके थोड़ी देर बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने भी TVK को समर्थन दे दिया। शुरुआत में आईयूएमएल डीएमके के साथ नजर आ रही थी, लेकिन बाद में उसने भी विजय को समर्थन देने का फैसला किया।


अब विजय के पास बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा पूरा हो गया है। पूरा गणित इस तरह है:

  • TVK – 107 विधायक
  • कांग्रेस – 5 विधायक
  • CPI और CPM – 4 विधायक
  • VCK – 2 विधायक
  • IUML – 2 विधायक
  • कुल समर्थन: 120 विधायक

टीवीके ने चुनाव में 108 सीटें जीती थीं, लेकिन विजय ने दो सीटों से जीत हासिल की है। ऐसे में उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ेगी, जिसके बाद पार्टी की संख्या 107 रह जाएगी।

अब संख्या पूरी होने के बाद टीवीके सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। लेकिन विजय के सामने अगली बड़ी चुनौती पांच साल तक इतनी कम बहुमत वाली गठबंधन सरकार को संभालने की होगी।

अगर कुछ विधायक भी नाराज होकर अलग हो जाते हैं, तो सरकार संकट में आ सकती है। वहीं कई पार्टियों ने “बाहरी समर्थन” दिया है, यानी वे सरकार को समर्थन तो देंगी लेकिन कुछ अहम मुद्दों पर डीएमके का साथ भी दे सकती हैं। ऐसे में विजय पर सहयोगी दलों की मांगें मानने का दबाव बना रह सकता है।

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