LPG संकट के बीच आई राहत भरी खबर, होर्मुज से निकले दो भारतीय जहाज; ईरानी नौसेना ने किया एस्कॉर्ट

LPG Tankers Jag Vasant Pine Gas: ये दोनों जहाज युद्ध शुरू होने के ठीक पहले से खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए थे। जग वसंत ने 26 फरवरी को होर्मुज के रास्ते खाड़ी में प्रवेश किया था और 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से कुछ घंटे पहले कुवैत से एलपीजी लोड की थी

अपडेटेड Mar 23, 2026 पर 4:09 PM
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28 फरवरी के बाद से होर्मुज का रास्ता बंद होने के कारण ये दोनों जहाज वहीं फंस गए थे

Hormuz Crisis: भारत में रसोई गैस यानी LPG की किल्लत के बीच एक राहत भरी खबर आई है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत के दो बड़े एलपीजी टैंकर, 'जग वसंत' और 'पाइन गैस' सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण हफ्तों से फंसे इन जहाजों का निकलना भारत की कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।

ईरानी तट के सहारे सुरक्षित रूट से निकले जहाज

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों जहाजों ने उसी सुरक्षित रूट का पालन किया है जो ईरान द्वारा क्लीयर किए गए जहाजों के लिए तय किया गया है। सोमवार सुबह ये जहाज यूएई तट से उत्तर की ओर ईरान के 'लारक और क्वेशम' द्वीपों की ओर बढ़े। अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों जहाजों ने ट्रांसपोंडर के जरिए अपनी 'भारतीय पहचान' को लगातार ब्रॉडकास्ट किया। इससे पहले निकले भारतीय जहाजों को ईरानी नौसेना द्वारा एस्कॉर्ट भी दिया गया था, जो भारत और ईरान के बीच हुए विशेष समझौते का हिस्सा है।


एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान होर्मुज के रास्ते को 'मैरीटाइम डिप्लोमेसी' के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। भारत का इन जहाजों को सुरक्षित निकाल लाना यह दर्शाता है कि भारत भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच भी अपने तटस्थ संबंधों को बनाए रखने में सक्षम है।

हफ्तों से फंसे थे जहाज

ये दोनों जहाज युद्ध शुरू होने के ठीक पहले से खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए थे। जग वसंत ने 26 फरवरी को होर्मुज के रास्ते खाड़ी में प्रवेश किया था और 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से कुछ घंटे पहले कुवैत से एलपीजी लोड की थी। पाइन गैस जहाज ने भी उसी समय प्रवेश किया था और यूएई के 'रुवैस' से अपना कार्गो लोड किया था। 28 फरवरी के बाद से होर्मुज का रास्ता बंद होने के कारण ये दोनों जहाज वहीं फंस गए थे।

क्या खत्म हो जाएगी भारत में गैस की किल्लत?

हालांकि इन जहाजों का आना भारत के लिए राहत की बात है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। सेंटोसा शिपब्रोकर्स के एमडी शिव सम्राट कपूर के अनुसार, अब तक आए और आ रहे चारों जहाजों का कुल कार्गो भारत की केवल 2 से 3 दिन की खपत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

बंदरगाहों को 'एलपीजी' के लिए हाई अलर्ट

घरेलू स्तर पर आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। 10 मार्च के मंत्रालय के निर्देश के बाद, दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (कांडला पोर्ट) ने सभी एजेंटों को निर्देश दिया है कि एलपीजी ले जाने वाले जहाजों को अन्य जहाजों के मुकाबले प्राथमिकता दी जाए। सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादन को भी तेज करने के निर्देश दिए हैं ताकि आम जनता को रसोई गैस के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।

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