महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनाव नतीजे 16 जनवरी को आए थे, लेकिन सबसे ज़्यादा चर्चा कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) को लेकर हुई। यहां नतीजों के बाद काफी राजनीतिक उठापटक देखने को मिली। इस हलचल ने बृहन्मुंबई नगर निगम से भी ज़्यादा लोगों का ध्यान खींचा। इसकी सबसे बड़ी वजह सत्ताधारी दलों के बीच अंदरूनी टकराव रहा। KDMC में असली मुकाबला सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच नहीं, बल्कि गठबंधन के अंदर ही देखने को मिला। एक तरफ कल्याण के सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (शिंदे गुट) थी, तो दूसरी तरफ उसके सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) थी, जिसका राज्य स्तर पर नेतृत्व रविंद्र चव्हाण कर रहे हैं। चुनाव के दौरान विपक्षी दल ज्यादा असर नहीं दिखा पाए, लेकिन अब उनकी सीटें काफी अहम हो गई हैं, क्योंकि वही तय करेंगी कि नगर निगम पर किसका कब्जा होगा।
