भारत बनेगा स्टार्टअप्स का ‘सुपरपावर’! केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 हजार करोड़ के फंड को दिखाई हरी झंडी

Startup India Fund: सरकार के इस फैसले का उद्देश्य वेंचर कैपिटल जुटाना और डीप टेक, तकनीक आधारित इनोवेटिव मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप और प्राइमरी ग्रोथ फेज के वेंचर्स को समर्थन देना है। यह स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) योजना का दूसरा फेज था। पहला फेज 2016 में स्थापित किया गया था

अपडेटेड Feb 14, 2026 पर 8:45 PM
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केंद्रीय कैबिनेट ने स्टार्टअप सेक्टर को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है।

Startup India Fund: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने स्टार्टअप सेक्टर को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के कुल फंड के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (Startup India FoF 2.0) बनाने को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य वेंचर कैपिटल जुटाना और डीप टेक, तकनीक आधारित इनोवेटिव मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप और प्राइमरी ग्रोथ फेज के वेंचर्स को समर्थन देना है। यह स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) योजना का दूसरा फेज था। पहला फेज 2016 में स्थापित किया गया था।

सरकार का फोकस इस क्षेत्रों पर

इस योजना का मकसद घरेलू निवेश को बढ़ावा देना, वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम को मजबूत करना और देशभर में इनोवेशन आधारित उद्यमिता को आगे बढ़ाना है। सरकार चाहती है कि इससे स्टार्टअप्स के विकास का अगला चरण और तेज हो। यह पहल स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा है। साल 2016 में शुरू हुई इस पहल के बाद भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बढ़ा है। जहां 2016 में 500 से भी कम स्टार्टअप थे, वहीं अब डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख से ज्यादा हो चुकी है। अनुमान है कि 2025 तक हर साल नए स्टार्टअप रजिस्ट्रेशन की रिकॉर्ड संख्या दर्ज की जाएगी।


स्टार्टअप इंडिया FoF 2.0 की खास बातें

स्टार्टअप इंडिया FoF 2.0 को भारतीय इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। इस नए फंड के तहत अलग-अलग क्षेत्रों को ध्यान में रखकर लक्षित और चरणबद्ध फंडिंग दी जाएगी।

  • डीप टेक और टेक्नोलॉजी आधारित मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस:  इस योजना में हाई-टेक और एडवांस टेक्नोलॉजी वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे प्रोजेक्ट्स को आमतौर पर लंबे समय तक निवेश और धैर्य की जरूरत होती है, इसलिए उन्हें खास समर्थन दिया जाएगा।
  • शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को सहारा:  नए और इनोवेटिव आइडिया लेकर आने वाले फाउंडर्स को शुरुआती दौर में आर्थिक मदद दी जाएगी। इसका मकसद फंड की कमी के कारण स्टार्टअप के बंद होने के जोखिम को कम करना और उन्हें मजबूत शुरुआत देना है।

देशभर में निवेश को बढ़ावा

इस योजना का उद्देश्य सिर्फ बड़े मेट्रो शहरों तक निवेश सीमित रखना नहीं है, बल्कि देश के छोटे शहरों और दूर-दराज़ इलाकों तक भी फंडिंग पहुंचाना है, ताकि हर जगह इनोवेशन को मौका मिल सके।

हाई-रिस्क क्षेत्रों में पूंजी की कमी दूर करना

यह फंड उन प्राथमिक क्षेत्रों में अधिक निवेश करेगा, जो आत्मनिर्भर भारत और तेज़ आर्थिक विकास के लिए जरूरी हैं। खासकर जहां जोखिम ज्यादा है और निजी निवेश कम मिलता है, वहां पूंजी की कमी को पूरा करने पर जोर दिया जाएगा।

घरेलू वेंचर कैपिटल को मजबूत करना

इस पहल के तहत भारत के अपने वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम को मजबूती दी जाएगी, खासकर छोटे फंड्स को समर्थन देकर। इससे देश में घरेलू निवेश का माहौल और बेहतर होगा। उम्मीद है कि स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 भारत की इनोवेशन आधारित विकास नीति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह फंड ऐसे स्टार्टअप्स को समर्थन देगा जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीक, उत्पाद और समाधान तैयार कर रहे हैं। इससे देश की आर्थिक ताकत बढ़ेगी, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी, बेहतर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत को वैश्विक इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

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