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भारत में स्टेम सेल थेरेपी का किया गलत इस्तेमाल तो फंस जाएंगे! सरकार ने नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए जारी की गाइडलाइन

स्टेम सेल रिसर्च और इलाज को लेकर सरकार ने नियम बनाये है। इसके मुताबिक स्टेम सेल थेरेपी हर बीमारी के इलाज के लिए नहीं की जा सकती। इसे सामान्य इलाज के तौर पर सिर्फ उन्हीं बीमारियों या स्वास्थ्य समस्याओं में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंजूरी दी है। इसका मकसद यह है कि स्टेम सेल से होने वाला इलाज तय नियमों के तहत और सुरक्षित तरीके से किया जाए।

Roopali Sharmaअपडेटेड Sep 17, 2026 पर 11:04 AM
भारत में स्टेम सेल थेरेपी का किया गलत इस्तेमाल तो फंस जाएंगे! सरकार ने नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए जारी की गाइडलाइन

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्टेम सेल थेरेपी में नियमों का सख्ती से पालन करने जारी की गाइडलाइन

स्टेम सेल थेरेपी को लेकर सरकार ने एक बार फिर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जरूरी गाइडलाइन दी हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिन्होंने स्टेम सेल थेरेपी से जुड़े नियमों के लिए ‘क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010’ को अपनाया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 30 जनवरी 2026 के एक फैसले के बाद उठाया गया है। एडवाइजरी में स्टेम सेल थेरेपी के इस्तेमाल और इसके रेगुलेशन से जुड़े नियमों को बताया है।

स्टेम सेल थेरेपी के नियम

नई एडवाइजरी में स्टेम सेल थेरेपी को लेकर मौजूदा नियमों को एक बार फिर साफ किया गया है। इसके मुताबिक, स्टेम सेल थेरेपी को हर बीमारी के सामान्य इलाज के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे ‘स्टैंडर्ड केयर’ यानी सामान्य क्लिनिकल इलाज का हिस्सा केवल उन्हीं बीमारियों या स्वास्थ्य समस्याओं के लिए बनाया जा सकता है, जिन्हें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की मंजूर सूची में शामिल किया गया है।

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