भारत पर रूसी तेल की खरीद से जुड़े 25% टैरिफ हटने का हो सकता है रास्ता, अमेरिका ने दिया संकेत

रूसी तेल की भारी खरीदारी के लिए सजा के तौर पर अमेरिका ने पिछले साल भारतीय सामानों के इंपोर्ट पर और 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया था। पश्चिमी देशों का कहना है कि तेल से होने वाली कमाई रूस के युद्ध प्रयासों की फंडिंग में मदद करती है

अपडेटेड Jan 24, 2026 पर 1:26 PM
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2022 में रूस और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत डिस्काउंटेड रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया।

अमेरिका ने संकेत दिया है कि भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए लगाए गए 25% टैरिफ को कम करने का रास्ता निकल सकता है। हालांकि यह लेवी अभी भी लागू है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मौके पर पॉलिटिको से कहा, "मुझे लगता है कि इन्हें (टैरिफ) हटाने का एक रास्ता है।" बेसेंट ने कहा कि यह टैरिफ इसलिए लगाया गया था क्योंकि भारत रूसी तेल खरीद रहा था और इसने वैसा ही काम किया जैसा सोचा गया था। बेसेंट के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों की ओर से रूसी तेल की खरीद में तब से भारी गिरावट आई है।

रूसी तेल की भारी खरीदारी के लिए सजा के तौर पर अमेरिका ने पिछले साल भारतीय सामानों के इंपोर्ट पर और 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद अब अमेरिका जाने वाले भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत है। 2022 में रूस और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत डिस्काउंटेड रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया। लेकिन पश्चिमी देश इसके विरोध में हैं। उन्होंने रूस के एनर्जी सेक्टर पर प्रतिबंध लगाए हैं। उनका कहना है कि तेल से होने वाली कमाई रूस के युद्ध प्रयासों की फंडिंग में मदद करती है।

बेसेंट ने कहा कि रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले से पहले भारतीय रिफाइनरियों द्वारा प्रोसेस किए जाने वाले तेल का केवल 2-3 प्रतिशत हिस्सा रूस से आता था। लेकिन रूसी कच्चे तेल पर प्रतिबंध लगने और भारी छूट पर बेचे जाने के बाद यह हिस्सा तेजी से बढ़ा। इससे भारतीय रिफाइनरों को ज्यादा मार्जिन कमाने का मौका मिला।


जनवरी की शुरुआत में ट्रंप ने दी थी नई धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल जनवरी की शुरुआत में एक पब्लिक एड्रेस में कहा था कि वह चाहते हैं कि भारत, रूस से तेल की खरीद बंद कर दे। अगर भारत रूसी तेल के मुद्दे पर सहयोग नहीं करता है तो अमेरिका, भारत से अपने यहां आने वाले सामान पर टैरिफ बढ़ा सकता है।

जनवरी महीने में ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दी। यह बिल ट्रंप को रूस के व्यापारिक भागीदारों पर रूसी तेल खरीदने के लिए दंड लगाने का व्यापक अधिकार देता है। रूस के ट्रेड पार्टनर्स में भारत, चीन और ब्राजील शामिल हैं। इस कानून के तहत अमेरिका को किसी भी ऐसे देश से आयात किए जाने वाले सभी सामानों पर 500% टैरिफ लगाने का अधिकार होगा, जो रूस से तेल, पेट्रोलियम उत्पादों या यूरेनियम की खरीद जारी रखते हैं।

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