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Unnao Rape Case: जेल से बाहर नहीं आएगा कुलदीप सेंगर, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के जमानत वाले आदेश पर लगाई रोक

Unnao Rape Case: CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें सेंगर को जमानत दी गई थी और उसकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित रहने के दौरान उसकी आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया गया था

Shubham Sharmaअपडेटेड Dec 29, 2025 पर 12:59 PM
Unnao Rape Case: जेल से बाहर नहीं आएगा कुलदीप सेंगर, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के जमानत वाले आदेश पर लगाई रोक
Unnao Rape Case: जेल से बाहर नहीं आएगा कुलदीप सेंगर

उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें सेंगर को जमानत दे दी गई थी। CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें सेंगर को जमानत दी गई थी और उसकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित रहने के दौरान उसकी आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया गया था।

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इस पर सुनवाई की। Live Law के मुताबिक, CBI के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह बहुत भयानक मामला है। इसमें 15 साल की बच्ची का बलात्कार हुआ था। ट्रायल कोर्ट ने दो मुख्य अपराधों पर आरोप तय किए थे - IPC की धारा 376 और POCSO एक्ट की धारा 5 व 6।

कोर्ट ने दो धाराओं पर दोषी ठहराया। सॉलिसिटर जनरल ने दोषसिद्धि आदेश का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि ट्रायल में पाया गया कि बच्ची 16 साल से कम उम्र की थी। इस दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित है।

CJI ने पूछा कि क्या यह अपील दोषसिद्धि के खिलाफ है? सॉलिसिटर जनरल ने कहा- हां। अपराध के समय धारा 376(2)(i) लागू थी, जो गंभीर बलात्कार के लिए है। इसमें न्यूनतम 20 साल की सजा, उम्रकैद तक हो सकती है। अगर कोई प्रभावी पद पर हो या 16 साल से कम की लड़की हो, तो यह धारा लगती है। यहां कोर्ट ने इसी धारा के तहत सजा दी।

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