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छांगुर बाबा पूर्व IPS को लड़ाने वाला था चुनाव, कई बड़े नेताओं के भेजे पैसे! खुल गई लाल डायरी, अब किस की बारी?

छांगुर पीर लगातार लखनऊ जाकर अपनी पैरवी करता रहता था। खुद को और अपने लोगों को कानून से बचाने के लिए पुलिस अधिकारियों से मेल-जोल बनाए हुए था। जलसों में वह पुलिस अधिकारी को चीफ गेस्ट बनाकर भी प्रचार करता था। पूर्व सांसद दद्दन मिश्रा भी मानते हैं कि छांगुर की अपील से मतदान पर असर पड़ने लगा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 17, 2025 पर 4:13 PM
छांगुर बाबा पूर्व IPS को लड़ाने वाला था चुनाव, कई बड़े नेताओं के भेजे पैसे! खुल गई लाल डायरी, अब किस की बारी?
पूर्व IPS को चुनाव लड़ाने की तैयारी, कई बड़े नेताओं के भेजे पैसे! सामने आई छांगुर बाबा की लाल डायरी

बलरामपुर के छांगुर बाबा के खिलाफ अवैध धर्मांतरण और राजनीति में गहरी पैठ बनाने की साजिशें खुलकर सामने आ गई हैं। जांच में पता चला है कि छांगुर पीर न केवल जिले में हिंदू परिवारों का जबरन धर्म बदलवा रहा था, बल्कि अब उसने राजनीति में भी अपने कदम जमाने का प्लान बना लिया था। इसके लिए वह उतरौला के एक पूर्व पुलिस अधिकारी को अगले विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने की तैयारी कर रहा था। इसी मामले की जांच के दौरान उसकी करीबी नीतू उर्फ नसरीन के कमरे से मिली एक लाल डायरी में कई बड़े नेताओं के नाम भी मिले हैं, जिन्हें चुनाव में पैसे दिए गए थे।

सूत्रों के अनुसार, छांगुर पीर लगातार लखनऊ जाकर अपनी पैरवी करता रहता था। खुद को और अपने लोगों को कानून से बचाने के लिए पुलिस अधिकारियों से मेल-जोल बनाए हुए था। जलसों में वह पुलिस अधिकारी को चीफ गेस्ट बनाकर भी प्रचार करता था। पूर्व सांसद दद्दन मिश्रा भी मानते हैं कि छांगुर की अपील से मतदान पर असर पड़ने लगा है।

छांगुर बाबा के कई पुलिस अफसरों से अच्छे संबंध थे। उसके करीबी बब्बू खान ने बताया कि एक पूर्व IPS अधिकारी की मदद से छांगुर पर जब-जब कार्रवाई होनी थी, उसे बचा लिया जाता था। यही नहीं, छांगुर और उसकी साथी नीतू दो महीने तक पुलिस और ATS को चकमा देकर लखनऊ में ही छिपे रहे। उनके लिए वकीलों की टीम भी तैयार करवाई गई थी।

बलरामपुर के अलग-अलग चुनावों में पिछले 10 सालों से छांगुर बाबा सक्रिय रहा है। वह कई उम्मीदवारों को चुनाव में पैसा देता था और अपने फॉलोअर्स से उनके पक्ष में वोट करने की अपील करता था। पंचायत चुनाव हों या विधानसभा- उसके दखल के बिना स्थानीय राजनीति अधूरी रहती थी।

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