उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने यूपी दिवस के अवसर पर विधानसभा चुनाव का शंखनाद किया और इसे लेकर भाजपा के इरादों को साफ किया। वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि में पार्टी कार्यकर्ताओं से 2027 के लिए कमर कसने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा इस बार भी महिला वोटबैंक पर विशेष ध्यान दे रही है, क्योंकि पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में महिलाओं ने जीत में अहम योगदान दिया था।
इसके साथ ही पार्टी यूपी में योजनाओं और लाभार्थियों के माध्यम से वोटबैंक मजबूत करने की रणनीति बना रही है। पहले दो दिन के घटनाक्रम से साफ है कि भाजपा अपने शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश स्तर के नेताओं के जरिए चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ा रही है।
वृद्धावस्था और महिला पेंशन बढ़ाने की तैयारी
प्रदेश में 67.50 लाख बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन मिलती है। वर्तमान में ग्रामीण इलाकों में 1,000 और शहरी इलाकों में 1,000 रुपए प्रति माह दी जाती है। सरकार अब इसे 1,500 रुपए करने पर विचार कर रही है। इसी तरह, निराश्रित महिलाओं को भी 1,000 रुपए पेंशन मिलती है, जिसे बढ़ाकर 1,500 रुपए करने की योजना है। इससे करीब 38.5 लाख महिलाओं को फायदा होगा।
दिव्यांग पेंशन और आशा कार्यकर्ताओं के लिए राहत
यूपी में 12 लाख दिव्यांगों को पेंशन मिलती है। इनमें से 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। उनकी पेंशन भी 1,500 रुपए तक बढ़ाई जा सकती है। वहीं, 1.70 लाख आशा कार्यकर्ताओं को गर्भवती महिलाओं और बच्चों की सेवा के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वर्तमान में ये 2,500 से 3,500 रुपए प्रति माह है, जिसे बढ़ाने का प्रस्ताव है।
शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने की योजना
लगभग 1.47 लाख शिक्षामित्रों और 28 हजार अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। पिछले 9 साल में मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। अब सरकार इसे 2,000 रुपए या उससे अधिक बढ़ाने पर विचार कर रही है। ये फैसला 2017 चुनाव के संकल्प पत्र के अनुरूप है।
सरकार इन बदलावों के लिए बजट तैयार कर रही है। वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि वृद्धावस्था, दिव्यांग और निराश्रित महिला पेंशन में सबसे अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं। इसलिए इन वर्गों को खुश करना राजनीतिक तौर पर भी फायदेमंद है। वित्तीय रूप से सरकार को GST, VAT, आबकारी और अन्य विभागों से अच्छी आमदनी हो रही है, जिससे गरीब कल्याण योजनाओं और पेंशन बढ़ोतरी पर खर्च किया जा सकता है।