UP Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले योगी कैबिनेट का रविवार (10 मई) को आखिरकार दूसरा विस्तार हो गया। मंत्रिमंडल विस्तार में छह नए चेहरों को योगी कैबिनेट में शामिल किया गया है। जबकि दो मौजूदा मंत्रियों का प्रमोशन हुआ है। समाजवादी पार्टी (SP) से बगावत करने वाले विधायक मनोज पांडेय को मंत्री बनाया गया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 'जन भवन' में आयोजित समारोह में चौधरी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
जिन 6 नए मंत्रियों को यूपी कैबिनेट में शामिल किया गया है, उनमें कृष्णा पासवान, पूर्व सपा नेता मनोज पांडे, कैलाश राजपूत, भूपेंद्र सिंह चौधरी, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा के नाम हैं। वहीं, जिन 2 मंत्रियों का प्रमोशन हुआ है, उनमें राज्यमंत्री अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर का नाम शामिल है। फिलहाल, उत्तर प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिलाकर कुल 54 मंत्री हैं। आज हुए विस्तार के बाद अब मंत्रियों की संख्या 60 हो गई है। उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में अधिकतम 60 मंत्री हो सकते हैं।
अगले वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मंत्रिपरिषद विस्तार को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह विस्तार पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में मार्च में हुए इसी तरह के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हुई है, जहां उत्तर प्रदेश की तरह ही 2027 में चुनाव होने हैं। मंत्रिमंडल विस्तार में जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखा गया है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के रविवार को हुए दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले मुरादाबाद के रहने वाले भूपेंद्र चौधरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं में गिना जाता है। चौधरी इससे पहले वर्ष 2017 से 2019 तक पंचायती राज राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और बाद में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और (BJP) में लंबे समय तक सक्रिय रहे चौधरी ने साल 1999 में संभल लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा था। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। चौधरी वर्ष 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य बने थे। वह वर्तमान में भी वह उच्च सदन के सदस्य हैं। वर्ष 2017 में प्रदेश में BJP सरकार बनने के बाद उन्हें पंचायती राज राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था। बाद में वर्ष 2019 में उन्हें इसी विभाग का कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया।
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल विस्तार पर तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार नौ साल में कुछ नहीं कर सकी, तो नए मंत्री नौ महीनों में क्या कर लेंगे। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सपा प्रमुख ने X पर पोस्ट कर सवाल किया, "मंत्रिमंडल में केवल छह रिक्तियां हैं, इससे ज्यादा तो दूसरे दल से पाला बदल कर आए लोग हैं, क्या उन सभी को मंत्री पद से नवाज़ा जाएगा?"
यादव ने कहा, "एक समाज के कई विधायकों में से किसी एक को चुना जाएगा तो चुनने का आधार क्या होगा?, अगर ऐसा हुआ तो बाकी दल-बदलुओं का क्या होगा?, उनकी उपेक्षा व अपमान को क्या कुछ ले-देकर शांत करा जाएगा? या उन्हें भी ये अहसास करा दिया जाएगा कि भाजपा किसी की सगी नहीं है?"
उन्होंने कहा, "बाकी छूटे हुए लोग क्या अपने को ठगा सा महसूस नहीं करेंगे? और वे अपने चुनाव क्षेत्र में मुंह दिखाने लायक बचेंगे क्या? इसके अतिरिक्त प्रश्न ये भी है कि उनके अपने दल के जो लोग मंत्री बनने के इंतजार में सूखकर कांटा हो गये हैं, उन बेचारों का क्या होगा?"
यादव ने यह भी कहा, "जिन वर्तमान मंत्रियों के विभाग कम किए जाएंगे तो क्या इससे जनता के बीच ये संदेश नहीं जाएगा कि वो नाकाम रहे, इसलिए उनसे मंत्रालय छीन लिया गया है? ऐसे मंत्री तो बिना लड़े ही क्या अपना चुनाव हार नहीं जाएंगे?"
सपा प्रमुख ने कहा, "साथी दलों को प्रतीक्षा के स्थान पर और कुछ मिलेगा या फिर उनको ये कहकर उपेक्षित कर दिया जाएगा… तुम थे जिनके सहारे, वो हुए न तुम्हारे... वो तो ठग हैं पुराने...… तुम ये सच न जाने…।" सपा अध्यक्ष ने सवाल किया कि जनता यह भी पूछ रही है कि आखिरी नौ महीनों में ये मंत्री क्या कर लेंगे, जब नौ वर्षों में सरकार कुछ नहीं कर सकी।