यूपी में किसानों को सरकारी खरीद केंद्रों पर MSP पर गेहूं बेचने में आ रही परेशानी खत्म, ये बड़ी रिलीफ मिली

UP News: उत्तर प्रदेश के किसान अब सरकारी खरीद केंद्रों पर बिना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराए भी गेहूं बेच सकेंगे। बयान में कहा गया है कि किसानों की पहचान और उनकी फसलों के सत्यापन के लिए डिजिटल प्रक्रिया अब अनिवार्य नहीं है। बयान में कहा गया है कि यह फैसला किसानों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए लिया गया है

अपडेटेड Apr 20, 2026 पर 3:24 PM
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UP News: उत्तर प्रदेश के किसानों को योगी सरकार ने बड़ी राहत दी है

UP News: उत्तर प्रदेश में किसानों को सरकारी खरीद केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचने में आ रही परेशानी अब हमेशा के लिए खत्म हो गई है। एक आधिकारिक बयान में सोमवार (20 अप्रैल) को कहा गया कि उत्तर प्रदेश के किसान अब सरकारी खरीद केंद्रों पर बिना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराए भी गेहूं बेच सकेंगे। बयान में कहा गया है कि किसानों की पहचान और उनकी फसलों के सत्यापन के लिए डिजिटल प्रक्रिया 'किसान रजिस्ट्री (Farmer Registry)' अब अनिवार्य नहीं है। बयान में कहा गया है कि यह फैसला किसानों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए लिया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को इस आदेश को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया है। इस साल की शुरुआत में सरकारी खरीद केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचने के इच्छुक किसानों के लिए किसान रजिस्ट्री को अनिवार्य कर दिया गया था। हालांकि, कई किसान रजिस्ट्रेशन न होने के कारण सरकारी केंद्रों पर अपनी फसल नहीं बेच पा रहे थे।

इस कारण उन्हें अपनी उपज बिचौलियों को कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था। किसानों की इस दुर्दशा का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल हस्तक्षेप किया। बयान में कहा गया है कि नए आदेश के तहत किसान अब बिना रजिस्ट्री के भी सरकारी खरीद केंद्रों पर अपना गेहूं बेच सकेंगे, ठीक वैसे ही जैसे वे पिछले वर्षों में करते थे।


सीएम योगी ने दिए नए आदेश

किसानों की समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल हस्तक्षेप किया। नए आदेश के अनुसार, अब किसान पूर्व के वर्षों की तरह बिना रजिस्ट्री के भी सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेच सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रय केंद्रों पर गेहूं बिक्री के लिए आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बेतहाशा गर्मी को देखते हुए सभी क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए पानी, पंखा, छाजन समेत सभी मूलभूत आवश्यकताओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए।

खाद्य एवं रसद विभाग के मुताबिक, 20 अप्रैल दोपहर 11 बजे तक 42 हजार से अधिक किसानों से 2.38 लाख टन से गेहूं खरीद की जा चुकी है। जबकि गेहूं बिक्री के लिए अब तक 4.77 लाख से अधिक किसानों ने रजिस्ट्रेशन भी कर लिया है। अब तक प्रदेश में 5,400 से अधिक क्रय केंद्र स्थापित कर लिए गए हैं।

'जनसेवा सरकार का कर्तव्य'

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 'जनता दर्शन' में राज्य के लोगों से मुलाकात की। इस बात पर जोर दिया कि जनसेवा सरकार का कर्तव्य है। आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोगों की शिकायतों का समाधान निर्धारित समय के भीतर किया जाए। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सभी उचित समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

'जनता दर्शन' में बरेली निवासी दीप्ति ने मुख्यमंत्री को अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वह किराए के मकान में रहती हैं। ठेला लगाकर आजीविका कमाती हैं। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उनके लिए बच्चों का पालन-पोषण करना बहुत मुश्किल हो रहा है।

आवास को लेकर सीएम योगी का बड़ा आदेश

इसके बाद, आदित्यनाथ ने बरेली के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि दीप्ति को 'प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना' का लाभ दिया जाए। साथ ही स्थानीय स्तर पर भी तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए। इस दौरान कुछ लोगों ने आवास की मांग से संबंधित प्रार्थना पत्र सौंपे। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार हर पात्र व्यक्ति को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध करा रही है।

मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों को आवेदकों के पत्र भेजते हुए उन्हें यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पात्र लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिले। आवेदकों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। आदित्यनाथ ने अधिकारियों को अनुमानित खर्च का पता लगाकर सरकार को तत्काल रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। सहायता का अनुरोध करने वालों को आश्वासन दिया कि उनके परिवार के सदस्यों के इलाज का इंतजाम किया जाएगा।

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कुछ अभिभावकों ने आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में हो रही कठिनाइयों का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कोई भी बच्चा स्कूल छोड़ने को मजबूर न हो। जरूरत पड़ने पर स्कूल मैनेजमेंट से बात किया जाए।

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