VCK को विजय की सरकार में मिल सकता है 1 मंत्री पद, CPI और CPM ने TVK को बाहर से दिया समर्थन

अब सहयोगी दलों के समर्थन के बाद टीवीके की ताकत बढ़कर 121 सीटों तक पहुंच गई है, जो बहुमत के आंकड़े से तीन सीट ज्यादा है। TVK गठबंधन में अब टीवीके की 108 सीटों के अलावा कांग्रेस की 5, VCK की 2, CPI की 2, CPI(M) की 2, IUML की 1 और AMMK की 1 सीट शामिल है

अपडेटेड May 08, 2026 पर 6:56 PM
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VCK को विजय की सरकार में मिल सकता है 1 मंत्री पद, CPI और CPM ने TVK को बाहर से दिया समर्थन

तमिलनाडु की राजनीति में कई दिनों से जारी सस्पेंस आखिरकार खत्म होता नजर आ रहा है। अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी TVK ने अब विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है और सरकार गठन का रास्ता लगभग साफ हो गया है। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। चुनाव में TVK ने अकेले दम पर 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया था। वहीं द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम को सिर्फ 59 सीटें मिलीं, जबकि अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम 47 सीटों पर सिमट गई।

अब सहयोगी दलों के समर्थन के बाद टीवीके की ताकत बढ़कर 121 सीटों तक पहुंच गई है, जो बहुमत के आंकड़े से तीन सीट ज्यादा है। TVK गठबंधन में अब टीवीके की 108 सीटों के अलावा कांग्रेस की 5, VCK की 2, CPI की 2, CPI(M) की 2, IUML की 1 और AMMK की 1 सीट शामिल है।

वामपंथी दलों ने विजय की सरकार और मंत्री मंडल में शामिल होने से इनकार कर दिया है। जबकि ऐसी खबर है कि विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK) को सरकार में एक मंत्री पद मिल सकता है।


वामदलों और छोटे सहयोगी दलों के समर्थन ने तमिलनाडु की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया है। कुछ समय पहले तक सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर विजय के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण सरकार बनाने का दावा स्वीकार करने को तैयार नहीं थे।

लेकिन अब 121 विधायकों के समर्थन के साथ विजय ने बहुमत साबित कर दिया है। विजय सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश करने के लिए राज्यपाल से मिलने भी पहुंच गए हैं।

तमिलनाडु की राजनीति में यह एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि दशकों से राज्य की सत्ता DMK और AIADMK के बीच घूमती रही थी। पहली बार किसी फिल्म स्टार की नई पार्टी इतनी तेजी से उभरकर सत्ता के करीब पहुंची है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की यह जीत सिर्फ चुनावी सफलता नहीं बल्कि तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के खिलाफ जनता के बड़े मूड परिवर्तन का संकेत भी है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ कब लेते हैं और उनकी नई सरकार किन प्राथमिकताओं के साथ काम शुरू करती है।

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