अरबपति उद्योगपति और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने घोषणा की है कि अमेरिका में अपने बेटे अग्निवेश के निधन के बाद वह अपनी संपत्ति का 75 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा समाज को दान कर देंगे। 49 साल के अग्निवेश की न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में स्कीइंग दुर्घटना से उबरने के दौरान अचानक दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल ने आत्मनिर्भर भारत के लिए अपने दिवंगत बेटे के विजिन पर जोर दिया और अग्निवेश के उन शब्दों को याद किया- 'देश के पास वो सब कुछ है, जिसकी उसे जरूरत है और उसे कभी पीछे नहीं रहना चाहिए।'
X पर अपने पोस्ट में अग्रवाल ने परोपकार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन मूल्यों पर प्रकाश डाला, जो उन्होंने अपने बेटे के साथ साझा किए थे। उन्होंने लिखा, “हमारा एक सपना था कि कोई भी बच्चा भूखा न सोए, किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित न रखा जाए, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और हर युवा भारतीय को सार्थक काम मिले। मैंने अग्नि से वादा किया था कि हमारी कमाई का 75% से ज्यादा हिस्सा समाज को वापस दिया जाएगा। आज मैं उस वादे को दोहराता हूं और और भी सादा जीवन जीने का संकल्प लेता हूं।”
आत्मनिर्भर भारत के अग्निवेश के विजिन का अग्रवाल के परोपकारी लक्ष्यों पर गहरा असर पड़ा।
अग्रवाल ने लिखा, “अग्निवेश आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में दृढ़ विश्वास रखते थे। वे अक्सर कहते थे, ‘पापा, एक राष्ट्र के रूप में हमारे पास किसी चीज की कमी नहीं है। हम कभी पीछे क्यों रहें?’”
उन्होंने अपने दुख को बयां करते हुए कहा, “आज मेरे जीवन का सबसे काला दिन है। मेरे प्यारे बेटे अग्निवेश ने हमें बहुत जल्द ही अलविदा कह दिया। वह महज 49 साल के थे, स्वस्थ थे, जीवन से भरपूर थे और उनके सपने भी बहुत थे। अमेरिका में स्कीइंग दुर्घटना के बाद, न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। हमें लगा था कि अब सब कुछ ठीक हो गया है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, और अचानक दिल का दौरा पड़ने से हमारा बेटा हमसे छिन गया।”
उन्होंने आगे लिखा, “अपने बच्चे को अलविदा कहने वाले माता-पिता के दर्द को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। एक बेटे को अपने पिता से पहले नहीं जाना चाहिए। इस क्षति ने हमें इस तरह से तोड़ दिया है कि हम अभी भी इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं।”
अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था और वे एक मध्यमवर्गीय बिहारी परिवार में पले-बढ़े। उन्होंने अजमेर के मेयो कॉलेज में पढ़ाई की, फुजैराह गोल्ड की स्थापना की और बाद में हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन बने।
अग्रवाल ने अपने बेटे को "एक खिलाड़ी, एक संगीतकार, एक लीडर" बताया, जो अपनी पेशेवर उपलब्धियों के बावजूद "सरल, मिलनसार और बेहद मानवीय" बने रहे।
अग्रवाल ने आगे कहा, “मेरे लिए वह सिर्फ मेरा बेटा नहीं था। वह मेरा दोस्त था। मेरा गौरव था। मेरी दुनिया था।”
उन्होंने अपने परिवार को सहयोग देने वाले मित्रों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों के प्रति आभार जताते हुए कहा, “उनके सामने पूरा जीवन पड़ा था। कई सपने अभी पूरे होने बाकी थे। उनकी अनुपस्थिति से उनके परिवार और मित्रों के लिए एक खालीपन सा आ गया है। हम उनके सभी मित्रों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों के आभारी हैं, जो हमेशा उनके साथ खड़े रहे।”
अनिल अग्रवाल नेचुरल रिसोर्सेज कंपनी वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड के फाउंडर और चेयरमैन हैं, और साथ ही अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के प्रमुख भी हैं, जो समूह की परोपकारी पहलों को अंजाम देता है।