Vinod Kumar Shukla passed away: जाने-माने हिंदी लेखक और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार (23 दिसंबर) शाम निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। उनके बेटे शाश्वत शुक्ल ने मंगलवार को यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने 1 नवंबर को विनोद कुमार शुक्ला से बात की थी और उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा था। शुक्ल के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा शाश्वत और एक बेटी है।
शाश्वत शुक्ल ने पीटीआई को बताया कि सांस लेने में तकलीफ होने के बाद शुक्ल को इस महीने की दो तारीख को रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया था जहां आज शाम 4.58 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। शाश्वत ने बताया कि शुक्ल के पार्थिव शरीर को पहले उनके निवास स्थान ले जाया जाएगा। उनके अंतिम संस्कार के संबंध में जल्द ही जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर माह में सांस लेने में हो रही तकलीफ के बाद शुक्ल को रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तबीयत में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी तब से वह घर पर ही इलाज करा रहे थे। उन्होंने बताया कि दो दिसंबर को अचानक तबीयत अधिक बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर एम्स ले जाया गया जहां उनका इलाज किया जा रहा था।
'नौकर की कमीज', 'खिलेगा तो देखेंगे', 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' और 'एक चुप्पी जगह' जैसे उपन्यासों के रचयिता विनोद कुमार शुक्ल को 59 वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 21 नवंबर को शुक्ल को उनके रायपुर स्थित निवास पर आयोजित एक समारोह में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था।
मशहूर हिंदी लेखकर विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुख जताया है। पीएम मोदी ने मंगलवार को X पर लिखा, "ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।"
वहीं, छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने विनोद शुक्ल के निधन पर शोक व्यक्त किया है। बघेल ने x पर लिखा, "छत्तीसगढ़ की साहित्यिक धरोहर, ज्ञान पीठ पुरस्कार से सम्मानित, हम सबके गौरव श्री विनोद कुमार शुक्ल जी का जाना छत्तीसगढ़ सहित देश भर के लिए अपूरणीय साहित्यिक क्षति है।"
कांग्रेस नेता ने कहा, "उन्होंने रायपुर के AIIMS अस्पताल में आज 04:58PM पर अंतिम सांस ली है। मैं ईश्वर से उनकी दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करता हूं। ईश्वर उनके परिवारजनों, उनके शुभचिंतकों एवं चाहने वालों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे। ॐ शांति।"
जाने-माने साहित्यकार ने साल 2024 में 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार जीता था। वह भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान पाने वाले छत्तीसगढ़ के पहले लेखक बने थे। शाश्वत ने PTI को बताया कि शुक्ला को इस साल अक्टूबर में एक प्राइवेट अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। लेकिन हालत में सुधार होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था।