Wang Yi Visit to India: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपनी भारत यात्रा के दौरान मंगलवार (19 अगस्त) को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। चीनी शीर्ष अधिकारी की प्रधानमंत्री मोदी के साथ यह मुलाकात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद हुई है। वांग यी ने डोभाल के साथ सीमा मुद्दे को लेकर वार्ता करने के लिए सोमवार 18 अगस्त को अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा शुरू की। वांग की यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी की शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की प्रस्तावित यात्रा से कुछ दिन पहले हो रही है।
NSA अजित डोभाल ने मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ वार्ता के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन के आगामी शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जाएंगे। डोभाल ने कहा कि सीमा पर शांति और सौहार्द बना हुआ है। उन्होंने कहा, "दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध अब और प्रगाढ़ हुए हैं।" NSA ने कहा, "हमारे प्रधानमंत्री एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए चीन का दौरा करेंगे और इसलिए आज की वार्ता का विशेष महत्व है।"
यह 31 अगस्त और 1 सितंबर को शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए PM मोदी की चीनी शहर तियानजिन यात्रा की पहली आधिकारिक पुष्टि है। डोभाल ने आशा जताई कि 24वीं विशेष प्रतिनिधि (एसआर) वार्ता सफल रहेगी। चीन के विदेश मंत्री मुख्य रूप से डोभाल के साथ विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता करने के लिए सोमवार को दिल्ली पहुंचे। वांग की यात्रा को दोनों पड़ोसी देशों द्वारा अपने संबंधों को फिर से बहाल करने के जारी प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। इनमें 2020 में गलवान घाटी झड़प के बाद गंभीर तनाव आ गए थे।
विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता में दोनों पक्षों द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (NSA) पर समग्र स्थिति की समीक्षा के अलावा नए विश्वास-बहाली उपायों पर विचार-विमर्श किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, दोनों पक्षों ने टकराव वाले स्थानों से सैनिकों को हटा लिया है। लेकिन सीमा से अग्रिम पंक्ति के सैनिकों को वापस बुलाकर स्थिति को सामान्य किया जाना अभी बाकी है। पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में एलएसी पर वर्तमान में दोनों देशों के लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं।
NSA डोभाल ने पिछले साल दिसंबर में चीन की यात्रा की थी। उस वक्त उन्होंने वांग के साथ विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता भी की थी। इससे कुछ हफ्ते पहले प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूसी शहर कजान में एक बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच विभिन्न संवाद तंत्रों को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया था।
पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध मई 2020 में शुरू हुआ था। उसी साल जून में गलवान घाटी में हुई झड़प के परिणामस्वरूप द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था। गत वर्ष 21 अक्टूबर को हुए एक समझौते के तहत डेमचोक और देपसांग से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह गतिरोध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया।