बुधवार को संसद में सभी पार्टियों की बैठक हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शाम 5 बजे हुई इस बैठक में सरकार ने विपक्षी नेताओं को बताया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है। ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ती जंग की वजह से तेल-गैस की सप्लाई बाधित होने की चिंता थी।
सरकार ने सभी नेताओं को भरोसा दिलाया कि अभी पेट्रोल, डीजल और LPG (रसोई गैस) की कोई कमी नहीं है। देश में पर्याप्त स्टॉक रखा गया है। और भी कई जहाज ईंधन लेकर भारत की ओर आ रहे हैं।
सरकार ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का बहुत सारा तेल गुजरता है, में कोई बड़ी समस्या अभी नहीं है। अगर जंग और बढ़ी तो भी भारत तैयार है।
विपक्षी दलों ने कहा कि सिर्फ बैठक में ब्रिफिंग देने से काम नहीं चलेगा। वे चाहते हैं कि इस मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में पूरी बहस हो।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक के फॉर्मेट पर आपत्ति जताई और कहा कि संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए।
राहुल गांधी बैठक में नहीं आए। उन्होंने कहा कि वे केरल में पहले से कार्यक्रम में थे। तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी बैठक में नहीं आई।
कई विपक्षी नेताओं ने पूछा कि अगर जंग और बढ़ गई तो भारत कितना तैयार है? घरों में गैस, पेट्रोल-डीजल और बिजली पर कितना असर पड़ेगा?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत की लगभग 60% रसोई गैस (LPG) तो देश में ही बनती है। बाकी का इंतजाम आयात और प्लानिंग से कर लिया गया है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान के बीच-बिचाव (मध्यस्थता) वाले सवाल पर कहा कि पाकिस्तान 1981 से इस इलाके में मध्यस्थता करता आ रहा है, इसलिए इसमें नया कुछ नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को "दलाल देश" कहकर उसकी आलोचना की। बैठक में मौजूद एक सदस्य ने बताया कि मंत्री ने कहा, "भारत पाकिस्तान की तरह दलाली का काम नहीं करेगा।"
विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी के हाल के इजराइल दौरे पर भी सवाल उठाए। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि पीएम ने कोविड काल का जिक्र करके अनावश्यक घबराहट न फैलाएं।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा था कि पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) की इस जंग का असर लंबे समय तक रह सकता है। सरकार ने पहले ही 7 शक्तिशाली समूह बना दिए हैं जो तेल, खाद, सप्लाई चेन, परिवहन और व्यापार पर नजर रख रहे हैं।