West Asia crisis: इजरायल-ईरान जंग के बीच पीएम मोदी ने की CCS की हाई-लेवल बैठक, भारतीयों की मदद के लिए दिए ये निर्देश

West Asia crisis: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (1 मार्च) रात को सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की। ऐसा माना जा रहा है कि इसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की गई। सीसीएस देश के सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है

अपडेटेड Mar 02, 2026 पर 10:12 AM
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West Asia crisis: पीएम मोदी ने अधिकारियों से कहा कि भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक कदम उठाएं

West Asia crisis: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति यानी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने रविवार (1 मार्च) रात पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति की समीक्षा की। CCS ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे घटनाक्रम से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक कदम उठाएं। रविवार रात हुई बैठक में सीसीएस ने युद्ध को शीघ्र समाप्त करने और संवाद एवं कूटनीति के जरिए मामले का हल निकालने के महत्व पर भी जोर दिया। सीसीएस देश के सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सीसीएस ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न हो रही स्थिति की समीक्षा करने के लिए बैठक की। इस दौरान उसे 18 फरवरी को ईरान में हुए हवाई हमलों और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों सहित बढ़ते तनाव के बारे में जानकारी दी गई। एक बयान में कहा गया है, "उसने क्षेत्र में रहने वाले बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।"

सीसीएस ने पश्चिम एशिया से होकर गुजरने वाले भारतीय यात्रियों और निर्धारित परीक्षाओं में शामिल हो रहे छात्रों के सामने आने वाली कठिनाइयों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों की भी समीक्षा की।


बयान के अनुसार, "सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को घटनाक्रम से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक और व्यवहार्य कदम उठाने का निर्देश दिया। उसने शत्रुता को शीघ्र समाप्त करने और संवाद एवं कूटनीति की ओर लौटने के महत्व पर बल दिया।"

सीसीएस की बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी उपस्थित थे।

पीएम मोदी के राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी के दो दिवसीय दौरे के बाद रात लगभग साढ़े 9 बजे राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने के तुरंत बाद सीसीएस की बैठक आयोजित की गई। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में शीर्ष अधिकारियों ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और भारत पर इसके प्रभावों के बारे में जानकारी दी।

सूत्रों के अनुसार, ऐसा माना जा रहा है कि बैठक में पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। साथ ही फंसे हुए लोगों की सुरक्षा और स्थिति बिगड़ने पर उससे निपटने के तरीकों पर चर्चा हुई। फिलहाल, पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र लगभग बंद है।

पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने के कारण हवाई सेवाएं बाधित हो गई हैं। इससे सैकड़ों भारतीय दुबई और अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। इनमें से कई लोग सोशल मीडिया पर भारतीय सरकार से सहायता की अपील कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरानी अधिकारियों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से उत्पन्न स्थिति का भी जायजा लिया गया, जो भारतीय तेल वाहक जहाजों के लिए एक प्रमुख मार्ग है।

ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक जबकि इजराइल में 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं। खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 90 लाख है। भारत ने अतीत में संघर्षों के बीच पश्चिम एशिया समेत दुनिया के विभिन्न हिस्सों से हजारों भारतीयों को सफलतापूर्वक निकाला है।

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विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि पूरे क्षेत्र में भारतीय दूतावास अपने नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं। साथ ही हेल्पलाइन सक्रिय कर दी गई हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इससे ईरानियों को अपने देश का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का सबसे बड़ा मौका मिला है। ट्रंप ने कहा कि भारी और सटीक बमबारी सप्ताह भर या जितने समय तक जरूरी होगी, जारी रहेगी।

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