पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक विजय का निहितार्थ क्या है? वास्तव में, यह कोई मात्र राजनीतिक घटना या सत्ता-विरोधी लहर से जनित परिणाम नहीं है। यह उस भूभाग में मूल राष्ट्रीय चेतना की पुनर्वापसी है, जिसने कभी भारत के सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी पुनर्जागरण को दिशा दी थी। स्वामी विवेकानंद, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, श्री अरबिंदो और रबींद्रनाथ टैगोर की भूमि ने अंततः अपनी मूल आत्मा की ओर लौटने का संकेत दिया है। यह वही पश्चिम बंगाल है, जिसने ‘वंदे मातरम्’ को जन्म दिया, जिसने राष्ट्रीय चेतना को शब्द, स्वर और विचार दिए। इसलिए इस नतीजे को केवल राजनीतिक चश्मे से देखना ठीक नहीं होगा।
