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बंगाल चुनाव से पहले अस्थायी शिक्षकों का बड़ा आंदोलन, सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे शिक्षक!

West Bengal News: प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे विकास भवन के बाहर डटे रहेंगे। उनका कहना है कि वे समाज की मुख्यधारा में बच्चों को लाने का काम करते हैं और शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें वह सम्मान और वेतन नहीं मिल रहा जिसके वे हकदार हैं

Suresh Kumarअपडेटेड Feb 27, 2026 पर 7:07 PM
बंगाल चुनाव से पहले अस्थायी शिक्षकों का बड़ा आंदोलन, सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे शिक्षक!
पैरा टीचरों की मुख्य मांग है कि उनकी सैलरी बढ़ाई जाए और स्थायी शिक्षकों के साथ वेतन में जो भारी असमानता है, उसे दूर किया जाए

West Bengal: पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले राज्य में विभिन्न कर्मियों दौरा अपनी-अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार (27 फरवरी) को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित विकास भवन के सामने पैरा टीचरों यानी अस्थाई टीचर का बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। राज्य के अलग-अलग जिलों से आए सैकड़ों अस्थाई शिक्षक विकास भवन के पास जुटे और अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। हालांकि, पुलिस ने विकास भवन के गेट के बाहर बैरिकेड कर प्रदर्शनकारियों को अंदर जाने से रोक दिया।

पैरा टीचरों की मुख्य मांग है कि उनकी सैलरी बढ़ाई जाए और स्थायी शिक्षकों के साथ वेतन में जो भारी असमानता है, उसे दूर किया जाए। उनका कहना है कि वे सिर्फ पढ़ाने का काम ही नहीं करते, बल्कि स्कूलों में कई अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय दिया जाता है। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का दावा है कि पिछले 22 साल से वे इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।

वहीं, प्रदर्शनकारी शिक्षक ने बताया कि 2011 में सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने सैलरी स्ट्रक्चर सुधारने का वादा किया था, लेकिन वह वादा आज तक पूरा नहीं हुआ। उनका कहना है कि वे कम से कम 50 बार विकास भवन, नबन्ना और कालीघाट में अपनी मांग रख चुके हैं। इसके बावजूद सिर्फ मामूली बढ़ोतरी हुई है, जो उनकी जरूरतों के हिसाब से नाकाफी है।

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे विकास भवन के बाहर डटे रहेंगे। उनका कहना है कि वे समाज की मुख्यधारा में बच्चों को लाने का काम करते हैं और शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें वह सम्मान और वेतन नहीं मिल रहा जिसके वे हकदार हैं।

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