West Bengal Fire: पश्चिम बंगाल में दर्दनाक हादसा! दो गोदामों में आग लगने से 7 लोगों की मौत, कई लोग लापता

West Bengal Fire: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में दर्दनाक आगजनी पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया तलाशी अभियान के दौरान करीब पांच बजे घटनास्थल से तीन शव बरामद किए गए। बाद में चार अन्य शवों को ढूंढ निकाला गया। अधिकारी ने बताया कि शव बुरी तरह झुलसे होने के कारण अभी मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है

अपडेटेड Jan 26, 2026 पर 11:20 PM
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West Bengal Fire: दक्षिण 24 परगना जिले में दो गोदामों में आग लगने से 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है

West Bengal Fire: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में आपस में अगल-बगल स्थित दो गोदामों में सोमवार (26 जनवरी) को आग लगने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। वहीं, कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोलकाता के नरेन्द्रपुर थाना क्षेत्र में नजीराबाद स्थित इन दो गोदाम में लगी आग पर सात घंटे की मशक्कत के बाद काबू पाया गया।

अधिकारी ने पीटीआई को बताया तलाशी अभियान के दौरान करीब पांच बजे घटनास्थल से तीन शव बरामद किए गए। बाद में चार अन्य शवों को ढूंढ निकाला गया। बारुईपुर जिले के पुलिस अधीक्षक शुभेंदु कुमार ने बताया कि शव बुरी तरह झुलसे होने के कारण अभी मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है।

उन्होंने कहा कि मलबा पूरी तरह से साफ होने के बाद ही पता चल पाएगा कि संबंधित स्थल पर कोई और शव तो नहीं है या मलबे में कोई व्यक्ति फंसा तो नहीं है। पुलिस ने बताया कि शुरुआत में छह लोगों के लापता होने की सूचना मिली थी। लेकिन फंसे हुए लोगों के परिवारों के मुताबिक यह संख्या 10 से अधिक हो सकती है। क्योंकि पास के गोदामों में साज सज्जा का काम करने वाली एक कंपनी और मोमो बेचने वाली एक कंपनी के मजदूर काम करते थे।


बंगाल के मंत्री सुजीत बोस ने कहा कि बचाव अभियान जारी है। जब उनसे दोनों यूनिट्स के मैनेजमेंट द्वारा फॉलो किए जा रहे फायर सेफ्टी नियमों के बारे में पूछा गया, तो बोस ने कहा, "फायर सेफ्टी ऑडिट साल में दो बार किए जाते हैं। इस दौरान हर कमी को दूर किया जाता है। हालांकि, यह मालिकों और कंपनी के अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे फायर सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करें।"

जैसे ही शाम ढलने लगी, मृतकों और लापता व्यक्तियों के कई रिश्तेदार घटनास्थल पर जमा हो गए। लोग फायर कर्मी एवं पुलिस अधिकारियों से स्थिति की जानकारी लेने लगे। तन्मय गिरि नाम के एक व्यक्ति ने बताया, "पूर्वी मेदिनीपुर के तमलुक के रहने वाले मेरे चाचा गोदाम के अंदर बने छोटे कमरों में रह रहे थे। वे एक कंपनी में काम करते थे। उन्होंने आखिरी बार रात करीब एक बजे फोन किया था और अब उनका फोन बंद है।"

उसने पीटीआई को बताया कि वह सुबह 9 बजे से उनका फोन आने का इंतजार कर रहा है। एक अन्य युवक ने बताया कि उसके पिता मोमो बनाने की एक इकाई में रात्रि पाली में काम के लिए आए थे। लेकिन तब से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। मृत या लापता सभी लोग पूर्वी मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जिलों के निवासी हैं।

घटनास्थल का दौरा करने वाले बिजली मंत्री अरूप बिस्वास ने इन दावों के बीच पत्रकारों से कहा कि घना धुआं छंटने के बाद ही यह पुष्टि की जा सकेगी कि कोई अंदर फंसा हुआ है या नहीं। उन्होंने कहा, "कोलकाता नगर निगम की टीम को दीवारों को तोड़ने और धुआं बाहर निकालने के लिए बुलाया गया है।"

बिस्वास ने कहा कि जब दमकलकर्मी और पुलिसकर्मी गोदाम में प्रवेश कर सकेंगे। तभी यह पुष्टि हो पाएगी कि अंदर कोई फंसा हुआ है या नहीं। अधिकारी ने बताया कि देर रात तीन बजे आग लगने की सूचना मिली और इसे दमकल की 12 गाड़ियों की मदद से बुझाया गया। आग पर सुबह करीब 10 बजे काबू पा लिया गया।

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उन्होंने कहा कि आग लगने का कारण अभी पता नहीं चला है। इससे हुए नुकसान का आकलन भी अभी नहीं हुआ है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर इतनी भीषण आग के दौरान आपदा प्रबंधन में असंवेदनशीलता और समन्वय की कमी’ का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि मंत्री और वरिष्ठ सरकारी एवं पुलिस अधिकारी गणतंत्र दिवस की छुट्टी मना रहे हैं। गरीबों की उन्हें कोई चिंता नहीं है। यह सरकार जितनी जल्दी जाए, उतना ही अच्छा है। पिछले साल 30 अप्रैल को मध्य कोलकाता के एक होटल में लगी भीषण आग में 14 लोगों की मौत हो गई थी।

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