Noida Violence News: कौन है नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड आदित्य आनंद? WhatsApp ग्रुप बनाकर ऐसे रची साजिश

Noida Protest Violence case: नोएडा पुलिस और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मिलकर मुख्य आरोपी आदित्य आनंद उर्फ ​​रस्ती को इस हफ्ते की शुरुआत में मजदूरों के हिंसक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने साजिश कबूल कर ली है

अपडेटेड Apr 19, 2026 पर 9:44 AM
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Noida Protest Violence case: नोएडा हिंसा में शामिल फरार आरोपी आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया है

Noida Protest Violence case: दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुए मजदूरों के आंदोलन को भड़काने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड मुख्य आरोपी आदित्य आनंद को नोएडा पुलिस और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद से आरोपी फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने साजिश कबूल कर ली है।

नोएडा हिंसा में आनंद की अहम भूमिका 

आरोपी को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया है। नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की जांच के क्रम में आदित्य आनंद की भूमिका सामने आई थी। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा, "नोएडा में मजदूरों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के आरोपी आदित्य आनंद को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया है। आगे की जांच चल रही है।"


1 लाख रुपये का था इनाम

उन्होंने कहा कि आरोपी प्रदर्शन के दौरान दोनों दिन मौजूद था। लेकिन उसके बाद से फरार हो गया था। पुलिस ने उसके खिलाफ कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी कराया था। उस पर एक लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। उन्होंने आगे बताया कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी को ट्रांजिट मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया है। इस मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में पहले ही आरोपी के दो सहयोगी, रूपेश राय और मनीषा चौहान, को गिरफ्तार किया जा चुका है।

हिंसा के पीछे सुनियोजित साजिश की आशंका

मुख्य आरोपी आदित्य आनंद की तलाश में पुलिस ने कई राज्यों में दबिश दी थी, जिसके बाद आखिरकार उसे तमिलनाडु से पकड़ा गया। इस मामले में पुलिस की छह टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस हफ्ते की शुरुआत में श्रमिकों के आंदोलन के दौरान हिंसा भड़क उठी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटनाएं केवल अचानक भड़की हिंसा नहीं थीं। बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश की आशंका भी जताई जा रही है। इसी कड़ी में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए षडयंत्र के एंगल पर भी गहन पड़ताल शुरू कर दी है। जांच टीमों द्वारा विभिन्न स्थानों से सैकड़ों CCTV कैमरों की फुटेज जब्त की गई है, जिनके आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

कौन है आदित्य आनंद?

पुलिस के अनुसार, आरोपी आदित्य पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर नोएडा लाया जा रहा है। इस मामले के संबंध में उसके दो साथियों मनीषा चौहान और रूपेश राय को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि आदित्य आनंद ने मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ गतिविधियों को उकसाने और उन्हें आयोजित करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

यह प्रदर्शन बाद में हिंसक रूप ले गया। आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर एक सोची-समझी योजना के तहत इस आंदोलन को और भड़काने की साजिश रची थी। नोएडा CP ने बताया, "रूपेश 2018 से और आदित्य 2020 से लगातार पूरे देश में घूम रहे थे। देश में जहां भी कोई आंदोलन होता है, वे वहां मौजूद रहते हैं। रूपेश राय खुद को ऑटो-रिक्शा चालक बताता है। जबकि आदित्य बेरोजगार है।"

QR कोड भेजकर WhatsApp से लोगों को भड़काया

CP ने यह भी कहा कि 31 मार्च और 1 अप्रैल को नोएडा के भीतर गतिविधियों का समन्वय किया गया था। इसके बाद, 9 और 10 अप्रैल को QR कोड भेजकर WhatsApp ग्रुप बनाए गए।" उन्होंने आगे कहा, "10 अप्रैल को मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन किया। 11 तारीख को उन्हें सड़कें जाम करने के लिए उकसाया गया। 11 अप्रैल को जब एक शांतिपूर्ण समझौता हो गया था, तब इन लोगों ने भड़काऊ भाषण दिए, जिससे मजदूर और भड़क गए।"

अधिकारी ने बताया कि उन्हीं के उकसाने पर 13 अप्रैल को मजदूरों को Motherson फैक्ट्री के सामने इकट्ठा होने के लिए लामबंद किया गया था। रूपेश को 11 अप्रैल को और मनीषा चौहान को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। आदित्य अभी भी फरार है। 13 अप्रैल को जब विरोध प्रदर्शन पर काबू पा लिया गया था, तब दो सोशल मीडिया (X) अकाउंट के जरिए गलत जानकारी फैलाई गई।"

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कमिश्नर ने आगे कहा, "इन लोगों ने VPN का इस्तेमाल किया था। ये अकाउंट पिछले तीन महीनों से पाकिस्तान से चल रहे थे। कुछ ऐसे तत्व हैं जो औद्योगिक क्षेत्रों में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं। सोशल मीडिया के जरिए मजदूरों को भड़काने के लिए एक डेटाबेस का इस्तेमाल किया गया था। इन सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े 13 मामले दर्ज किए गए हैं।"

अब तक 62 गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, अब तक 62 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें आगज़नी में शामिल 9 लोग और पुलिस पर हमला करने वाली भीड़ के सदस्य शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों में से ज्यादातर लोग मज़दूर नहीं हैं। पुलिस ने बताया कि इस हिंसा में शामिल कुछ लोग इस इलाके के बाहर से आए थे। उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) जैसी केंद्रीय एजेंसियां ​​भी इस जांच में शामिल हो गई हैं।

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