Bengal Teachers Recruitment Scam: पश्चिम बंगाल के हजारों सरकारी टीचर्स को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (17 अप्रैल) को कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी, वे नई चयन प्रक्रिया पूरी होने तक पढ़ाना जारी रख सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह राहत केवल 'बेदाग' शिक्षकों के लिए है। यानी जिनके नाम 2016 की नियुक्तियों की जांच के दौरान किसी भी अनियमितता से नहीं जुड़े थे। शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को 31 मई तक नई भर्ती शुरू करने और 31 दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी करने का भी निर्देश दिया।
9वीं से 12वीं के छात्रों के हितों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन शिक्षकों को रियायत दी जो भर्ती से जुड़े गड़बडी में शामिल नहीं थे। यह रियायत इसी अकादमिक सत्र के लिए मिली है। शीर्ष अदालत द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने के फैसले के बाद राज्य में शिक्षकों की कमी को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने कोर्ट से रियायत की मांग की थी। दागी शिक्षकों को कोई राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को 31 मई तक या उससे पहले भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को लेकर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध करार दिया गया था। 3 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल सेवा आयोग द्वारा 2016 की भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाए जाने के बाद राज्य प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को अमान्य कर दिया था।
पश्चिम बंगाल शिक्षक घोटाला कथित तौर पर 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) द्वारा शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती में व्यापक अनियमितताएं शामिल हैं। 2016 में शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं से जुड़े इस घोटाले के कारण कलकत्ता हाई कोर्ट ने 25,753 नियुक्तियां रद्द कर दीं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। जांच में पता चला कि ओएमआर शीट में हेराफेरी की गई और राजनीतिक हस्तियों को फंसाकर रिश्वत के आधार पर नियुक्तियां की गईं।
जांच में बाद में भर्ती प्रक्रिया में हेराफेरी का पता चला, जिसमें छेड़छाड़ की गई ओएमआर शीट, फर्जी मेरिट लिस्ट और खाली उत्तर पुस्तिकाओं के आधार पर नियुक्तियां शामिल थीं। नौकरी पाने वाले कई लोगों ने कथित तौर पर योग्यता को पूरी तरह दरकिनार करते हुए अपनी स्थिति सुरक्षित करने के लिए रिश्वत दी।