मछली खाने वालों के लिए उसका स्वाद और ताजगी सबसे जरूरी होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो मछली आप बड़े चाव से खा रहे हैं, वो वाकई ताजा है या नहीं? आजकल बाजार में हर चीज की मिलावट आम हो गई है और मछली भी इससे अछूती नहीं है। कहीं गलती से बासी या केमिकल वाली मछली आपके घर ना आ जाए, यही सबसे बड़ी चिंता है। बहुत से लोग रंग, गंध या बनावट से मछली की असलियत पहचान नहीं पाते और दुकानदार का भरोसा ही काफी मान लेते हैं। लेकिन सिर्फ़ दिखावे पर भरोसा करना कई बार सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
खासकर गर्मी और बरसात के मौसम में मछली जल्दी खराब होती है और सही जानकारी न होने पर पुरानी मछली घर आ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि आप मछली खरीदते वक्त सतर्क रहें और कुछ आसान बातों का ध्यान रखें।
रंग और बनावट से पहचानें मछली की ताजगी
असली ताजा मछली की त्वचा चमकदार और गलफड़े गहरे लाल रंग के होते हैं। अगर गलफड़े सफेद या फीके दिखाई दें, तो समझ जाइए कि मछली पुरानी है। कुछ दुकानदार धोखा देने के लिए उसमें लाल रंग मिला देते हैं, इसलिए गलफड़ों पर हाथ फेरकर देखना चाहिए कि रंग उतर तो नहीं रहा।
गंध और स्पर्श से करें जांच
ताजी मछली में हल्की-सी समुद्री गंध आती है, जबकि सड़ी मछली में बदबू महसूस होती है। स्पर्श से भी आप फर्क पहचान सकते हैं ताजा मछली पर उंगली दबाने पर वह तुरंत अपनी शेप में लौट आती है। अगर दबाने के बाद गड्ढा बना रह जाए, तो वह मछली खाने लायक नहीं है।
आजकल कुछ व्यापारी मछलियों को जल्दी खराब होने से बचाने के लिए फॉर्मेलिन जैसे रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। एक आसान ट्रिक ये है कि अगर मछली पर मक्खियां नहीं बैठ रही हैं, तो उसमें रसायन होने की संभावना है। ताजा मछली पर आमतौर पर मक्खियां आती हैं।
आंखों से भी मिलेगी सही पहचान
मछली की आंखें भी उसकी ताजगी का संकेत देती हैं। अच्छी मछली की आंखें साफ, चमकीली और उभरी हुई होती हैं। दूसरी ओर, बासी मछली की आंखें धुंधली, धंसी और कभी-कभी काली दिखने लगती हैं। ये भी एक भरोसेमंद तरीका है।