पपीता असली है या मिलावटी? जानिए तुरंत पहचानने का तरीका

क्या आप भी बाजार में रखे चमकदार, सुनहरे और एकदम साफ-सुथरे पपीते देखकर आकर्षित हो जाते हैं? अगर हां, तो अब थोड़ा सतर्क हो जाएं। ऐसे पपीते देखने में जितने सुंदर लगते हैं, जरूरी नहीं कि उतने ही सेहतमंद हों। कई बार इनके पीछे छिपी सच्चाई आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है

अपडेटेड May 10, 2026 पर 2:12 PM
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अगर आप पपीता घर ले आए हैं, तो उसे काटकर भी उसकी सच्चाई पता कर सकते हैं।

गर्मी के मौसम में पपीता लोगों की डाइट का अहम हिस्सा बन जाता है। स्वाद और सेहत से भरपूर यह फल पेट को दुरुस्त रखने से लेकर त्वचा को हेल्दी बनाए रखने तक कई फायदे देता है। यही कारण है कि बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। लेकिन आजकल फलों को जल्दी पकाने की होड़ में कई जगह खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल भी बढ़ गया है। बाहर से चमकदार और पूरी तरह पीला दिखने वाला पपीता हर बार प्राकृतिक रूप से पका हो, यह जरूरी नहीं।

कई बार ऐसे फल सिर्फ देखने में आकर्षक होते हैं, जबकि अंदर से सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। ऐसे में बाजार से पपीता खरीदते समय थोड़ी सावधानी बेहद जरूरी हो जाती है, ताकि स्वाद के साथ आपकी सेहत भी सुरक्षित रह सके।

रंग ही खोल देता है पूरा राज


प्राकृतिक रूप से पका पपीता कभी भी एक जैसा पीला नहीं होता। इसमें हल्का हरा और पीला रंग मिला-जुला दिखाई देता है। आमतौर पर यह नीचे से पीला होना शुरू होता है और ऊपर डंठल की तरफ थोड़ा हरा रहता है।

वहीं केमिकल से पकाया गया पपीता अचानक पूरी तरह चमकीला पीला नजर आता है। कई बार उस पर गहरे हरे धब्बे भी दिखाई देते हैं, जो बताते हैं कि फल को जबरदस्ती पकाया गया है।

हल्के दबाव से समझिए असली खेल

कुदरती तरीके से पका पपीता हल्का मुलायम होता है। अगर आप उसे धीरे से दबाते हैं, तो वह थोड़ा दब जाता है।

लेकिन केमिकल वाला पपीता बाहर से पका हुआ दिखने के बावजूद अंदर से कच्चा रह सकता है। ऐसे फल को दबाने पर वह काफी सख्त महसूस होता है।

खुशबू बताएगी असली पहचान

असली पके पपीते की सबसे बड़ी पहचान उसकी मीठी खुशबू होती है। खासकर डंठल के पास से एक प्राकृतिक और मनमोहक सुगंध आती है।

वहीं केमिकल से पकाए गए पपीते में या तो खुशबू नहीं होती या फिर उससे अजीब-सी दवाई जैसी गंध आती है।

ज्यादा चमकदार पपीते से रहें सावधान

प्राकृतिक रूप से पके पपीते के छिलके पर छोटे-छोटे भूरे या काले दाग दिखाई दे सकते हैं। यह बिल्कुल सामान्य बात है और बताता है कि फल अपनी गति से पका है।

लेकिन अगर पपीता जरूरत से ज्यादा साफ, बेदाग और चमचमाता दिखे, तो थोड़ा सतर्क हो जाइए। कई बार यही “परफेक्ट लुक” केमिकल का संकेत होता है।

काटते ही सामने आ जाता है सच

अगर आप पपीता घर ले आए हैं, तो उसे काटकर भी उसकी सच्चाई पता कर सकते हैं। प्राकृतिक पपीता अंदर से लाल-नारंगी रंग का और मीठा होता है। इसके बीज भी गहरे काले रंग के होते हैं।

वहीं केमिकल वाला पपीता अंदर से कहीं-कहीं सफेद या कच्चा निकल सकता है। इसका स्वाद फीका होता है और बीज भी अधपके या सफेद दिखाई दे सकते हैं।

खरीदते समय अपनाएं ये समझदारी

बहुत ज्यादा पीले और चमकीले पपीते खरीदने से बचें। कोशिश करें कि थोड़ा हरा और हल्का पीला पपीता लें और उसे घर पर प्राकृतिक तरीके से पकने दें। इससे फल का स्वाद भी बेहतर रहेगा और आपकी सेहत भी सुरक्षित रहेगी।

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