One District One Cuisine: देवरिया के 'शाही मालपुआ' का स्वाद चखकर उंगलियां चाटती है दुनिया, जानिए इस पारंपरिक मिठास की रसीली कहानी
One District One Cuisine: देवरिया का पारंपरिक 'शाही मालपुआ' अपने मखमली, रसीले स्वाद और शुद्ध देसी घी की खुशबू के लिए दुनिया भर में मशहूर है। उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जिला, एक कुजीन' (ODOC) योजना के तहत अब इस ऐतिहासिक मिठास को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश का देवरिया जिला केवल अपनी ऐतिहासिक और राजनीतिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि अपने खान-पान के पारंपरिक स्वादों के लिए भी मशहूर है। यदि गोरखपुर अपने लिट्टी-चोखा और गार्लिक समोसे के लिए दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहा है, तो पड़ोसी जिला देवरिया भी अपने 'शाही मालपुआ' के दम पर वैश्विक पटल पर धाक जमा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जिला, एक कुजीन' (ODOC) योजना के तहत देवरिया के इस पारंपरिक मालपुए को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी जा रही है।
देवरिया का मालपुआ केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि यहां की मेहमाननवाजी और संस्कृति का एक बेहद मीठा हिस्सा है।
देवरिया के मालपुए का इतिहास और खासियत
देवरिया में मालपुआ बनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। यहां के त्योहार, शादियां और खुशियों के मौके इस मिठास के बिना अधूरे माने जाते हैं। वैसे तो मालपुआ देश के कई हिस्सों में बनता है, लेकिन देवरिया के मालपुए की बात ही कुछ अलग है। यहां इसे बनाने का पारंपरिक तरीका आज भी जिंदा है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बाहर से हल्का सा कुरकुरा और अंदर से एकदम मखमली व रसीला होता है। शुद्ध देसी घी, रबड़ी के मेल और चाशनी के सही तापमान के कारण यह मुँह में जाते ही घुल जाता है। ODOC योजना के आने के बाद अब स्थानीय हलवाइयों को आधुनिक पैकेजिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि देवरिया की यह अनमोल मिठास फ्रोजन और डिब्बाबंद फॉर्मेट में देश-विदेश के बाजारों तक सुरक्षित पहुंच सके।
रेसिपी:
* तैयारी का समय: 15 मिनट (बैटर को रखने का समय अलग)
* पकाने का समय: 25-30 मिनट
* सर्विंग्स: 4-5 लोग
मुख्य सामग्री:
* बैटर (घोल) के लिए: मैदा (1 कप), सूजी/रवा (2 चम्मच - कुरकुरेपन के लिए), गाढ़ा दूध या मलाई (आधा कप), सौंफ पाउडर (1 छोटा चम्मच), हरी इलायची पाउडर (आधा छोटा चम्मच), और घोल बनाने के लिए हल्का गुनगुना दूध।
* चाशनी के लिए: चीनी (1 कप), पानी (एक कप), केसर के कुछ धागे और इलायची।
* तलने और गार्निशिंग के लिए: शुद्ध देसी घी (तलने के लिए), बारीक कटे पिस्ता और बादाम।
बनाने की विधि:
1. बैटर तैयार करना: एक बड़े बर्तन में मैदा, सूजी, सौंफ पाउडर और इलायची पाउडर को मिला लें। अब इसमें मलाई या गाढ़ा दूध डालें। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा गुनगुना दूध डालते हुए एक चिकना और बहने वाली कंसिस्टेंसी (Pouring consistency) का घोल तैयार करें। ध्यान रहे कि घोल में गुठलियां न पड़ें। इस घोल को कम से कम 1 से 2 घंटे के लिए ढककर रख दें ताकि सूजी अच्छी तरह फूल जाए।
2. चाशनी बनाना: एक पैन में चीनी और पानी मिलाकर उबलने के लिए रखें। इसमें केसर के धागे और कुटी हुई इलायची डालें। हमें कोई एक या दो तार की चाशनी नहीं बनानी है, बस एक चिपचिपी और शहद जैसी गाढ़ी चाशनी तैयार करनी है। चाशनी बनकर तैयार होने पर इसे गुनगुना ही रखें।
3. मालपुआ तलना: एक चौड़ी और चपटी कढ़ाई (Flanged pan) में देसी घी गरम करें। आंच को मध्यम रखें। अब एक कलछी (Ladle) में बैटर लें और उसे घी के बीच में एक जगह पर धीरे से गिराएं। वह अपने आप गोल आकार ले लेगा।
4. सेंकना और चाशनी में डुबोना: मालपुए को दोनों तरफ से अलट-पलट कर हल्का सुनहरा और किनारों से कुरकुरा होने तक तलें। इसके बाद इसे घी से निकालें, अतिरिक्त घी निचोड़ें और तुरंत गुनगुनी चाशनी में डाल दें। मालपुए को 3-4 मिनट तक चाशनी में डूबा रहने दें ताकि वह रस को अंदर तक सोख ले।
5. परोसना: रसीले मालपुए को चाशनी से बाहर निकालें। इसके ऊपर बारीक कटे हुए पिस्ता, बादाम और यदि संभव हो तो थोड़ी गाढ़ी मलाईदार रबड़ी डालकर गरमा-गरम परोसें।
प्रो टिप: देवरिया के हलवाइयों का राज यह है कि वे बैटर में सौंफ को पीसने के बजाय हल्का सा दरदरा कूट कर डालते हैं। जब घी में तली हुई सौंफ का स्वाद चाशनी के साथ मुंह में आता है, तो इसका जायका कई गुना बढ़ जाता है।