One District One Cuisine: मुगलों के जमाने से है मुरादाबादी दाल का कनेक्शन, इसकी कहानी जानिए और घर पर बनाने का तरीका भी
One District One Cuisine: उत्तर प्रदेश की एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) योजना के तहत मुरादाबाद की 400 साल पुरानी मुरादाबादी दाल को वैश्विक पहचान दी जा रही है। शहजादे मुराद बख्श की पसंदीदा यह मखमली मूंग दाल अब 20 लाख रुपये तक के सरकारी अनुदान और आधुनिक ब्रांडिंग के जरिए स्वरोजगार का नया जरिया बनेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों एक जनपद एक व्यंजन यानी वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन (ODOC) योजना को स्वीकृति दी है। इसके तहत यूपी के सभी जिलों के पारंपरिक व्यंजनों को अब राज्य, देश और वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी। इन्हें मॉडर्न टेक्नोलॉजी, शानदार पैकेजिंग और ब्रांडिंग की मदद से देश और विदेश तक पहुंचाया जाएगा। खास बात यह है कि इस कवायद में लगे लोगों के रोजगार को सपोर्ट करने के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये (योजना का 25 फीसदी) तक के अनुदान देने की व्यवस्था भी की गई है। यूपी की योगी सरकार ने इसके लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है। आइए इसी कड़ी में हम आपको परिचित कराते हैं उत्तर प्रदेश के रिच खानपान से। यहां आपको बताएंगे कि यूपी के किस जिले का कौन सा कुजीन ODOC की लिस्ट में शामिल है और अगर आप इसे घर पर बनाना चाहें तो कैसे बनाएं। आज की शुरुआत करते हैं मशहूर मुरादाबादी दाल से.
उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद जिला अपनी पीतल की कारीगरी के लिए दुनिया भर में मशहूर है। स्वाद की दुनिया में इस शहर की असली पहचान यहां की मुरादाबादी दाल से है। यूपी में 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत पीतल उद्योग को तो बढ़ावा मिल ही रहा है, लेकिन अब मुरादाबादी दाल को भी इस पहल के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नई और विशिष्ट पहचान मिल रही है। यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि मुरादाबाद की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत का एक अहम हिस्सा है। मुरादाबादी दाल की कहानी और इसे घर पर बनाने तरीका आज आप जान ही लीजिए-
मुरादाबादी दाल का शाही इतिहास
मुरादाबादी दाल का इतिहास लगभग 400 साल पुराना है। इसकी शुरुआत 1625 के आसपास मानी जाती है, जब मुगल बादशाह शाहजहां के बेटे शहजादे मुराद बख्श ने मुरादाबाद शहर की नींव रखी थी। इतिहासकारों और जानकारों के अनुसार शहजादे मुराद बख्श को राजस्थानी मूंग दाल का स्वाद बहुत प्रिय था, लेकिन वे इसमें कुछ नयापन और अलग स्वाद चाहते थे। उनकी इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए शाही रसोइयों ने मूंग की धुली दाल को धीमी आंच पर घंटों पकाकर एक नया टेस्ट बना दिया। शहजादे को दाल का यह हल्का और मखमली रूप इतना पसंद आया कि वे इसे दिन में कई बार अलग-अलग टॉपिंग्स के साथ खाना पसंद करने लगे। तभी से यह दाल मुरादाबाद की पहचान बन गई।
क्यों खास है यह दाल?
मुरादाबादी दाल अन्य पारंपरिक दालों से बिल्कुल अलग है क्योंकि इसे मुख्य भोजन के बजाय 'दाल की चाट' के रूप में अधिक खाया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका सादापन है। से बिना किसी भारी मसाले के केवल उबालकर तैयार किया जाता है, और इसका असली जायका ऊपर से डाली जाने वाली सामग्रियों (टॉपिंग्स) से आता है।
मुरादाबादी दाल की रेसिपी (Moradabadi Dal Recipe)
तैयारी का समय: 10 मिनट
पकाने का समय: 30-40 मिनट
सर्विंग्स: 2-3 लोग
मुख्य सामग्री:
दाल: 1 कप धुली हुई पीली मूंग दाल (30 मिनट तक भिगोई हुई)।
मसाले (उबालते समय): 1/2 छोटा चम्मच हींग, नमक स्वादानुसार और एक चुटकी हल्दी।
टॉपिंग्स (स्वाद के अनुसार):
मक्खन, भुना हुआ जीरा पाउडर और काला नमक, बारीक कटी अदरक (जूलियन्स), हरी मिर्च और ताजा हरा धनिया। नींबू का रस और तली हुई सूखी लाल मिर्च।
स्पेशल टच: कुरकुरी पापड़ी या बिस्कुटी रोटी।
बनाने की विधि (Step-by-Step Guide)
1. दाल उबालें: एक भारी तले के बर्तन या प्रेशर कुकर में भीगी हुई दाल और 3 कप पानी डालें। इसमें नमक, हींग और हल्दी डालकर धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक दाल पूरी तरह गल न जाए। बेहतरीन और असली स्वाद के लिए इसे खुले बर्तन में धीमी आंच पर पकाना सबसे अच्छा माना जाता है।
2. दाल को मथना (मैश करना): जब दाल अच्छी तरह पक जाए, तो इसे मथनी या कलछी की मदद से अच्छी तरह घोट लें। दाल को तब तक मथें जब तक यह एक चिकनी, मखमली और गाढ़ी क्रीम जैसी न हो जाए। ध्यान रहे कि इसमें दाल के खड़े दाने नहीं दिखने चाहिए।
3. तड़का (ऑप्शनल): पारंपरिक रूप से इसे बिना तड़के के खाया जाता है। हालांकि, अगर आप चाहें तो घी में हींग और साबुत लाल मिर्च का हल्का तड़का ऊपर से लगा सकते हैं।
4. परोसने का तरीका (Chaat Style): मुरादाबादी दाल का असली मजा इसे परोसने के तरीके में है। गरम दाल को मिट्टी के कुल्हड़ या बाउल में निकालें। दाल के बीच में मक्खन की एक बड़ी टिक्की रखें। ऊपर से भुना जीरा, काला नमक, अदरक के लच्छे और बारीक कटी हरी मिर्च छिड़कें। अंत में नींबू का रस डालें और ऊपर से कुरकुरी पापड़ी का चूरा सजाकर परोसें।
प्रो टिप: मुरादाबाद के स्थानीय लोग इस नमकीन दाल को अक्सर गरमा-गरम जलेबियों के साथ नाश्ते में खाते हैं। ऐसे में मीठे और नमकीन का एक ऐसा टेस्टी मेल तैयार होता है कि लोग चटकारे लगाते रह जाते हैं।