महारानी ऑफ बड़ौदा, राधिकाराजे गायकवाड़ हाल ही में एक ऐसा शाही लम्हा लेकर आईं, जिसे देख हर कोई हैरान रह गया उन्होंने अपनी 100 साल पुरानी पैठणी साड़ी को 40 साल बाद फिर से सबके सामने पहना। यह साड़ी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि मराठी संस्कृति, इतिहास और रॉयलिटी की अनमोल विरासत है। जानिए, इस साड़ी की दिलचस्प दास्तान।
पैठणी साड़ी महाराष्ट्र की सबसे जानी-मानी पारंपरिक साड़ियों में से एक है। इसकी पहचान है रेशम की शानदार बुनाई, चमकीला रंग, और सुनहरे जरी के पल्लू। आमतौर पर इसे खास मौके पर ही पहना जाता है।
राधिकाराजे गायकवाड़ का परिवार सालों से शाही परंपरा निभाता आया है। उनकी अलमारी में ऐसी कई बेमिसाल विरासतें हैं, लेकिन यह 100 साल पुरानी पैठणी बेहद खास है। इसे उनकी सासू मां ने 40 साल पहले पहना था।
इस साड़ी की बुनाई उस दौर की है, जब हर धागा हाथ से तैयार होता था। ये करीब 1920 के आस-पास की बनी हुई है। तब पैठणी साड़ी बनाना एक महीनों का कठिन काम होता था।
इतनी पुरानी साड़ी को रेडी करना आसान नहीं था। इसे संभालकर रखने के साथ ही इसे खास तरीके से रखा गया ताकि इसकी चमक और डिजाइन बरकरार रहें। महारानी ने वैशाली स्टूडियो के फैशन शो में साड़ी पहनकर जैसे ही एंट्री ली, तो सब उन्हें देखते रह गए।
इस पैठणी में लाल, नारंगी और सुनहरे रंगों की गजब की झलक है। पल्लू और बॉर्डर पर बारीक मोर, फूल और पत्तियां बनाई गई हैं जैसे पूरा कपड़ा एक कलाकृति बन गया हो।
राधिकाराजे ने साड़ी को ट्रेडिशनल मराठी गोल नथ, गजरा और हेवी जूलरी के साथ पहना, जिससे उनका लुक बिलकुल क्लासिकल महारानी की तरह नजर आया।
वैसे तो हमेशा ही महारानी राधिकाराजे के शाही साड़ी लुक्स लोगों का ध्यान खींच लेते हैं, लेकिन उनका लेटेस्ट लुक कुछ खास है। यहां वह डिजाइनर वैशाली से किया अपना वादा निभाने के लिए हैंडलूम डे पर रैंप पर उतरीं और अपने शाही ठाठ- बाट दिखाकर छा गईं।
महारानी ने वैशाली के लेटेस्ट शो 'नाद: द साउंड ऑफ द लूम' में गुलाबी साड़ी पहनकर जैसे ही वॉक किया, तो उनका स्टाइल कमाल का लगा।चेहरे के हाव- भाव और गुलाबी पैठणी साड़ी में खुद को कैरी करने का उनका रॉयल अंदाज इतना कमाल का लगा कि उनके आगे किसी और पर नजरें ही नहीं गई।
आजकल पैठणी साड़ी को सेलिब्रिटी और फैशन डिजाइनर भी मार्केट में ला रहे हैं, लेकिन ऐसी सौ साल पुरानी, हेंडलूम असली पैठणी बहुत कम ही दिखाई देती है। इस नजारे के बाद पैठणी का कलेक्शन जगजाहिर हो गया।
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