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फैसला लेने से पहले डरते हैं, तो कृष्ण की ये बात देगी हिम्मत और सुकून!

डर कई बार हमारी जिंदगी के फैसलों पर इतना असर डालता है कि हम नौकरी, रिश्ते, सपने या अपनी बात तक को लेकर पीछे हटने लगते हैं। जब मन बार-बार नतीजे, नुकसान या लोगों की सोच के बारे में चिंता करता है, तो छोटी-सी बात भी बड़ी चुनौती जैसी लगने लगती है। भगवद्गीता की सीख हमें याद दिलाती है कि हर समय नतीजे की चिंता करने के बजाय अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए। जब इंसान अपना काम पूरी ईमानदारी और आत्मविश्वास से करता है, तो धीरे-धीरे डर कम होता है और मन में शांति व उत्साह आने लगता है।

Roopali Sharmaअपडेटेड Sep 02, 2026 पर 4:28 PM
फैसला लेने से पहले डरते हैं, तो कृष्ण की ये बात देगी हिम्मत और सुकून!

जिंदगी में डर लगना आम बात है। हर किसी को कभी न कभी किसी चीज को खोने, असफल होने या लोगों की बातों का डर है। कई बार यही डर इतना बढ़ जाता है कि हम अपनी पसंद का काम नहीं करना चाहते। कोई नौकरी छोड़ने से डरता है, कोई अपनी बात कहने से, तो कोई नया कदम उठाने से क्योंकि उसे लगता है कि सब कुछ उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ तो क्या होगा। इस तरह डर धीरे-धीरे हमारे फैसलों पर असर डालने लगता है और हम कई मौके सिर्फ इसलिए छोड़ देते हैं क्योंकि हमें आगे का नतीजा साफ दिखाई नहीं देता।

भगवद्गीता की कर्मयोग की सीख हमें एक आसान और जरूरी बात समझाती है। हर चीज का नतीजा हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन अपनी तरफ से सही काम करना हमारे हाथ में जरूर है। इसलिए बार-बार यह सोचने के बजाय कि आगे क्या होगा, हमें अपने आज के काम पर ध्यान देना चाहिए। जब इंसान नतीजे की चिंता थोड़ी कम करके अपने कर्म पर भरोसा करता है, तो मन का डर धीरे-धीरे कम होने लगता है।

1. डर नहीं, सोच-समझकर कदम बढ़ाएं

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